
Sonia Gandhi On National Education Policy: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भारत की शिक्षा नीति को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) केंद्र सरकार का '3C' एजेंडा (Centralisation, commercialisation and communalisation) आगे बढ़ा रही है। इससे संघीय शिक्षा ढांचा कमजोर हो रहा है।
बता दें कि, सोनिया गांधी ने अखबार 'द हिंदू' में लिखे एक लेख में कहा कि NEP शिक्षा का केंद्रीकरण कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकारों को महत्वपूर्ण निर्णयों से बाहर रखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि 2019के बाद से केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की कोई बैठक नहीं हुई। जबकि इस बैठक में केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्रियों को शिक्षा नीति पर विचार-विमर्श करना चाहिए था।
89,000स्कूल बंद, RSS से जुड़े लोगों की भर्ती
सोनिया गांधी ने दावा किया कि 2014से अब तक 89,441स्कूल बंद हो चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा क्षेत्र में बीजेपी-आरएसएस से जुड़े लोगों की बड़े पैमाने पर भर्ती की जा रही है। उनका कहना है कि इस नीति से शिक्षा प्रणाली कमजोर हो रही है, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा।
शिक्षा के व्यवसायीकरण पर चिंता
उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा को जनसेवा की भावना से अलग कर व्यापार बना रही है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को ऋण पर निर्भर बनाने और छात्रों की फीस बढ़ाने पर भी सवाल उठाए। साथ ही, पाठ्यक्रम में बदलाव, संविधान की प्रस्तावना हटाने और महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े तथ्यों में छेड़छाड़ को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती अव्यवस्था
सोनिया गांधी ने पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं और NTA व NAAC जैसी संस्थाओं की विफलता पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति एकतरफा हो रही है, जिससे शिक्षा का स्तर गिर रहा है।
शिक्षा नीति पर पुनर्विचार की मांग
सोनिया गांधी ने कहा कि NEP 2020को लागू करने से पहले राज्य सरकारों से कोई सलाह नहीं ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति जनता के हितों के खिलाफ साबित हो रही है। उन्होंने सरकार से शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और इसे सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।
Leave a comment