
नई दिल्ली: द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का सबसे खूनी संघर्ष जिसमें सात करोड़ से ज़्यादा लोग मारे गए थे. द्वितीय विश्व युद्ध 1939से 1945तक चलने वाला विश्व-स्तरीय युद्ध था. लगभग 70देशों की थल-जल-वायु सेनाएं इस युद्ध में सम्मलित थीं. इस युद्ध में विश्व दो भागों मे बंटा हुआ था- मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र. द्वितीय विश्व युद्ध 6सालों तक लड़ा गया. इस युद्ध में विभिन्न राष्ट्रों के लगभग 10 करोड़ सैनिकों ने हिस्सा लिया और यह मानव इतिहास का सबसे ज़्यादा घातक युद्ध साबित हुआ.
इस वर्ष द्वितीय विश्व युद्ध के समापन की 76वीं वर्षगाठ मनाई जा रही है. आठ मई 1945को नाजी जर्मनी ने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया था. और लाखों लोगों की जान लेने वाले द्वितीय विश्वयुद्ध पर विराम लग गया था.
आइये जाने इस खूनी युद्ध में भारत की क्या भूमिका थी.
द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत की भूमिका को नजरअदांज नहीं किया जा सकता है. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भारत में ब्रिटिश राज था. ऐसे में भारत आधिकारिक रूप से न चाहते हुए भी नाज़ी जर्मनी के विरुद्ध 1945में युद्ध की घोषणा कर दी. ब्रिटिशों की तरफ से 20लाख से अधिक भारतीय सैनिकों को युद्ध के लिए भेजा गया. जिन्होने ब्रिटिश साम्रज्य का समर्थन करते हुए धुरी शक्तियों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी. इसके अलावा भारत के सभी देसी रियासतों ने युद्ध के लिए बड़ी मात्रा में अंग्रेजों को धनराशि प्रदान की गई.
द्वितीय विश्वयुद्ध में मित्र देशों के इस मुहिम में भारत की भागीदारी मजबूत थी. भारत के द्वारा दी गई वित्तीय, औद्योगिक और सैन्य सहायता के कारण ही नाजी जर्मनी और इंपीरियल जापान के विरुद्ध नाज़ी जर्मनी को सफलता मिल पायी. भारत की भौगोलिक और सामरिक स्थिति का मित्र देशों को काफी अधिक लाभ हुआ. हिंद महासागर के द्वारा आवाजाही का काफी फायदा हुआ.
भारत के द्वारा बड़े हथियारों का उत्पादन, और इसकी विशाल सशस्त्र सेनाओं ने दक्षिण-पूर्व एशियाई थिएटर में इंपीरियल जापान की प्रगति को रोकने में एक निर्णायक भूमिका निभाई. बता दे कि इस युद्ध में भारतीय सेना मित्र सेना बलों से भी अधिक थी. इस युद्ध में करीब 87हजार भारतीय सैनिक शहीद हुए थे. युद्ध की समाप्ति पर, भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी औद्योगिक शक्ति के रूप में उभरा था.
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