
East Asia Summit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में आसियान-भारत वार्षिक सम्मेलन में दक्षिण पूर्व एशियाई देशों की भौगोलिक संप्रभुता का समर्थन करते हुए चीन की आक्रामकता की ओर इशारा किया। शुक्रवार को ईस्ट एशिया सम्मेलन में, उन्होंने हिंद प्रशांत क्षेत्र और साउथ चाइना सी के मुद्दों पर चर्चा की, जिससे चीन को स्पष्ट संकेत मिला।
कानूनी मानकों का पालन जरूरी
मोदी ने हिंद प्रशांत क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों को कानून के दायरे में लाने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि इसे संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून (UNCLOS) के अनुसार संचालित किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने साउथ चाइना सी के संदर्भ में एक ठोस और प्रभावी आचार संहिता बनाने की मांग की, जो आसियान के सभी दस सदस्य देशों द्वारा भी समर्थित है।
शांति का संदेश
एक दिन पहले, चीन के प्रधानमंत्री ली शियांग के साथ बैठक में आसियान नेताओं ने इन मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया था। मोदी ने कहा, "दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों का नकारात्मक प्रभाव ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ रहा है। हम सभी चाहते हैं कि शांति और स्थिरता जल्द से जल्द बहाल हो।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि "यह युद्ध का युग नहीं है," और समस्याओं का समाधान युद्ध के माध्यम से नहीं किया जा सकता।
आतंकवाद का खतरा
पीएम मोदी ने आतंकवाद को वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बताते हुए सभी देशों को एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। लाओस की राजधानी विएनताने में आसियान नेताओं के साथ म्यांमार की स्थिति पर चर्चा की गई, जहां भारत ने आसियान के दृष्टिकोण का समर्थन किया।
म्यांमार में मानवीय सहायता का समर्थन
मोदी ने कहा कि "हम म्यांमार के लिए मानवीय सहायता जारी रखने के पक्ष में हैं और लोकतंत्र की बहाली के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।"
दोपहर बाद दिल्ली लौट आए PMमोदी
पीएम मोदी ने दोपहर बाद लाओस से नई दिल्ली के लिए प्रस्थान किया। उन्होंने आसियान-भारत सम्मेलन और ईस्ट एशिया सम्मेलन में भाग लिया, जहां साउथ चाइना सी का मुद्दा कई बार उठाया गया। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस 19वें ईस्ट एशिया सम्मेलन में उन्हें पहले बोलने का अवसर दिया गया, क्योंकि उन्होंने इस सालाना सम्मेलन में सबसे अधिक बार (नौ बार) भाग लिया है, जो भारत की आसियान मामलों में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
सम्मेलन में शामिल सभी नेताओं को नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित उच्च शिक्षा सम्मेलन में भाग लेने के लिए भी आमंत्रित किया गया।
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