
Tahawwur Rana Statement: अमेरिका से प्रत्यर्पित किए गए 26/11 मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को भारत लाया गया है। फिलहाल वह एनआईए की 18 दिन की हिरासत में है। उससे लगातार पूछताछ हो रही है। शुरुआती पूछताछ में राणा ने माना है कि उसके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकियों से संबंध रहे हैं।
राणा ने बताया कि वह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चिंचबुतुनी गांव में पैदा हुआ था। उसे सेना की वर्दी पहनने और भारत के खिलाफ काम करने का जुनून था। वह पाकिस्तानी अफसर साजिद मीर और मेजर इकबाल से मिलने के लिए वर्दी या नकली भेष में जाता था। सेना से अलग होने के बाद भी वह लश्कर-ए-तैयबा और हुजी जैसे संगठनों के साथ जुड़ा रहा।
परिवार में पढ़ाई और प्रोफेशनल्स का माहौल
राणा ने बताया कि उसके पिता वली मोहम्मद स्कूल में प्रिंसिपल हैं। एक भाई पाकिस्तानी सेना में मनोचिकित्सक और दूसरा पत्रकार है। राणा ने हसन अब्दाल स्थित कैडेट कॉलेज से पढ़ाई की। वहीं उसकी मुलाकात डेविड हेडली से हुई। साल 1997में वह अपनी डॉक्टर पत्नी के साथ कनाडा चला गया। वहां उसने इमिग्रेशन सर्विस और हलाल स्लॉटर हाउस की शुरुआत की।
भारत में हेडली को दी आतंकी मिशन में मदद
राणा ने हेडली को भारत में पहचान छुपाकर काम करने में मदद की। उसने हेडली को वीजा दिलवाया और उसका पाकिस्तानी मूल छिपाया। कराची से मुंबई की फ्लाइट की टिकट भी राणा ने बुक की। “बी” नाम के एक कर्मचारी को हेडली की ज़रूरतों के लिए नियुक्त किया। उस कर्मचारी को हेडली की साजिश की जानकारी नहीं थी। उसी ने भारत में हेडली के लिए ठहरने, रिसेप्शन और मोबाइल सुविधा का इंतज़ाम किया।
जल्द होगा मिस्ट्री गवाह से आमना-सामना
एनआईए अब राणा का आमना-सामना एक खास गवाह से कराने वाली है। यह वही गवाह है जिसने 2006में मुंबई में हेडली का स्वागत किया था। माना जा रहा है कि उस वक्त राणा और इस गवाह के बीच करीबी संबंध थे।
राणा की गिरफ्तारी के बाद 26/11 हमले की साजिश के कई नए पहलू सामने आ रहे हैं। एनआईए की जांच से उम्मीद है कि आतंकियों के नेटवर्क और गहराई से उजागर होंगे।
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