
Waqf Amendment Act: केंद्र सरकार ने सोमवार, 8अप्रैल से नया वक्फ कानून पूरे देश में लागू कर दिया है। इसके लिए सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना भी जारी की है। यह कानून वक्फ संशोधन विधेयक के संसद में पास होने के बाद अस्तित्व में आया है।
पहले यह विधेयक लोकसभा और फिर राज्यसभा में पेश किया गया। दोनों सदनों में बहस और मतदान के बाद इसे मंजूरी मिली। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधेयक पर हस्ताक्षर किए और यह कानून बन गया।
सरकार का दावा - गरीब मुसलमानों और महिलाओं को मिलेगा लाभ
सरकार का कहना है कि इस कानून से देश के गरीब और पसमांदा मुसलमानों के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं की स्थिति में सुधार होगा।लोकसभा में हुए मतदान में 288सांसदों ने समर्थन किया और 232ने विरोध जताया। इसके बाद राज्यसभा में भी इस पर लंबी चर्चा हुई और विधेयक 128बनाम 95मतों से पास हो गया।
सरकार के अनुसार, इस कानून से वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता आएगी और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार होगा। हालांकि, विपक्ष ने इस कानून को ‘मुस्लिम विरोधी’ और ‘असंवैधानिक’ बताते हुए खारिज कर दिया है।
मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
नए कानून के लागू होते ही विरोध तेज हो गया है। देश के कई मुस्लिम संगठन इस कानून का विरोध कर रहे हैं।कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
जावेद की याचिका में कहा गया है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करता है। इसमें वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन पर मनमाने प्रतिबंध लगाए गए हैं।उनके वकील अनस तनवीर का कहना है कि यह कानून भेदभावपूर्ण है, क्योंकि इसमें ऐसे नियम हैं जो दूसरे धार्मिक संस्थानों पर लागू नहीं होते।
ओवैसी की ओर से याचिका वकील लजफीर अहमद ने दाखिल की है। उन्होंने तर्क दिया है कि यह कानून संविधान के अधिकारों का उल्लंघन करता है और मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव करता है।
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