Haryana Polls: वक्फ बोर्ड कानून पर अमित शाह का बड़ा बयान; क्या चुनाव में भावनात्मक कार्ड खेल रही है भाजपा?

Haryana Polls: वक्फ बोर्ड कानून पर अमित शाह का बड़ा बयान; क्या चुनाव में भावनात्मक कार्ड खेल रही है भाजपा?

Haryana Election: हरियाणा विधानसभा चुनाव में केवल एक सप्ताह का समय बचा है, और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी को इस बार चुनावी लड़ाई में मजबूत समझा जा रहा है, जबकि भाजपा भी पूरे उत्साह के साथ चुनावी मैदान में डटी हुई है। भाजपा ने हाल के दिनों में भावनात्मक मुद्दों पर जोर देकर अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की है।

गृह मंत्री अमित शाह का सख्त संदेश

रविवार को हरियाणा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने वक्फ बोर्ड कानून का जिक्र करते हुए कहा, "इससे काफी परेशानी हो रही है, लेकिन इसे इसी संसद सत्र में ठीक कर देंगे।" यह बयान भाजपा की योजना का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य हिंदू मतदाताओं को एकजुट करना है। शाह ने मतदाताओं को यह भी याद दिलाया कि 3अक्टूबर से नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, और 5अक्टूबर को मतदान होगा। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'शक्ति' से लड़ने के बयान का जिक्र किया, मतदाताओं से कांग्रेस के खिलाफ वोट करके जवाब देने का आग्रह किया।

योगी आदित्यनाथ की भावनात्मक अपील

भाजपा के लिए चुनाव प्रचार करने आए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इसी तरह के भावनात्मक मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा, "राम मंदिर बन चुका है, अब कृष्ण के मंदिर का निर्माण होना चाहिए।" उन्होंने यह भी बताया कि अगर भाजपा सत्ता में नहीं आती, तो राम मंदिर का निर्माण संभव नहीं होता। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370के समाप्त होने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग भी "राम-राम" कहने लगे हैं, जिससे भाजपा का यह संदेश और स्पष्ट हुआ।

दलित समुदाय पर फोकस

योगी आदित्यनाथ ने फरीदाबाद में अपनी एक जनसभा में यह भी कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार ने अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि के नाम पर एयरपोर्ट बनवाया है, जबकि कांग्रेस के शासनकाल में ऐसा कोई कार्य नहीं हुआ। यह बयान दलित मतदाताओं को आकर्षित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के छोटे और मझोले नेता भी इसी प्रकार के भावनात्मक मुद्दों को हवा देकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।

एंटी इनकमबेंसी फैक्टर और वादों की समानता

हरियाणा के चुनाव में भाजपा को एंटी इनकमबेंसी फैक्टर का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पार्टी केंद्र-राज्य सरकार में दस वर्षों से है। कांग्रेस ने नाराज वर्गों की उम्मीद के रूप में उभरने की कोशिश की है। दोनों पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में कई वादे किए हैं, जो काफी हद तक समान हैं। भाजपा ने 24प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की योजना की घोषणा की है, जबकि कांग्रेस ने इसे कानूनी अधिकार बनाने की बात कही है।

भावनात्मक मुद्दों का सहारा

भाजपा की यह रणनीति भावनात्मक मुद्दों पर निर्भर है, जो उसकी चुनावी रणनीति का मुख्य हिस्सा है। इस बार भी पार्टी ने हरियाणा चुनाव में इस दृष्टिकोण को अपनाया है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि क्या ये भावनात्मक अपीलें वास्तव में मतदाताओं को प्रभावित कर पाएंगी या नहीं।

हरियाणा विधानसभा चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी पार्टी अपनी रणनीतियों में सफल रहती है और मतदाताओं का विश्वास जीतने में सफल होती है।

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