
Murshidabad Violence: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मालदा में बनाए गए राहत शिविर अब राहत केंद्र नहीं रहे, बल्कि उन्हें हिरासत शिविर बना दिया गया है। शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उन्होंने यह बात साझा की।
उन्होंने दावा किया कि इन शिविरों में रह रहे हिंदू शरणार्थियों को न तो बाहर की दुनिया से संपर्क करने की अनुमति है और न ही उन्हें साफ-सुथरा खाना मिल रहा है। अधिकारी ने आरोप लगाया कि लोगों को कंकड़ मिला चावल और कीड़ों वाली सब्जियां दी जा रही हैं।
वक्फ कानून के विरोध में भड़की हिंसा के बाद शरणार्थी हुए बेघर
11अप्रैल को वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में हिंसा भड़क उठी। इस घटना में दो लोगों की जान गई, कई घायल हुए और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। यह अशांति मालदा, दक्षिण 24परगना और हुगली जिलों तक फैल गई।
इस हिंसा के बाद कई हिंदू परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा। कुछ लोग झारखंड के पाकुड़ जिले चले गए, जबकि कई ने मालदा के राहत शिविरों में शरण ली।
पुलिस पर मदद रोकने और स्वयंसेवकों को डराने का आरोप
सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस उन स्वयंसेवकों को परेशान कर रही है जो शिविरों में मदद पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहत सामग्री को जब्त कर गोदामों में रखा जा रहा है और शिविरों में घटिया सामान भेजा जा रहा है। इसके साथ ही, मदद करने वालों पर झूठे केस दर्ज किए जा रहे हैं।
राज्य सरकार से कार्रवाई रोकने की मांग
सुवेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह इस दमनकारी रवैये को तुरंत बंद करे। उन्होंने कहा कि शरणार्थियों को इंसान की तरह जीने का हक मिलना चाहिए, जिसमें साफ खाना, सुरक्षा और बातचीत की आज़ादी शामिल है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और पुलिस का मौजूदा रवैया लोकतंत्र और मानवता दोनों के खिलाफ है।
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