Wayanad Landslide: लगा लाशों का ढेर, मरने वालों की संख्या बढ़ी, राहत बचाव में सेना लगा रही पूरी ताकत

Wayanad Landslide: लगा लाशों का ढेर, मरने वालों की संख्या बढ़ी, राहत बचाव में सेना लगा रही पूरी ताकत

Wayanad Landslide: वायनाड भूस्खलन त्रासदी में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सीएम पिनाराई विजयन ने पुष्टि की है कि अब यह आंकड़ा 106तक पहुंच गया है। प्रभावित इलाकों में कई लोगों के लापता होने की खबर है। अधिकारियों ने बताया कि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं और विभिन्न अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है।केरल के मुख्य सचिव डॉ वी वेणु ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि राज्य सरकार ने वायनाड के चुरामाला में भूस्खलन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। इस गंभीर त्रासदी को देखते हुए केरल में मंगलवार और बुधवार को दो दिन का आधिकारिक शोक रहेगा। इन दोनों दिन राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और राज्य सरकार के सभी आधिकारिक कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं।

दरअसल, केरल के वायनाड में ऐसी तबाही शायद ही पहले देखी गई हो। यकीन करना मुश्किल है कि जहां कल तक हरियाली थी, वहां मलबा ही मलबा नजर आ रहा है। जहां कभी बस्तियां थीं, वहां अब सिर्फ तबाही का मंजर है। यहां बारिश के बाद खिसकी जमीन के साथ घरों का मलबा दबा हुआ है। वायनाड में प्राकृतिक आपदा के रणक्षेत्र में देश की तीनों सेनाएं बचाव अभियान में उतर गई हैं। तीनों सेनाएं राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। भारतीय वायु सेना ने राज्य सरकार और एनडीआरएफ अधिकारियों की मदद के लिए वायनाड में बचाव और राहत कार्यों के लिए एक एमआई-17 और एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टर तैनात किया है। बचाव कार्य में सेना और नौसेना के गोताखोर भी शामिल हैं।

हेलीकॉप्टर से प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही है सेना

जानकारी के मुताबिक, राहत कार्यों के लिए पहले से ही तैनात लगभग 225 कर्मियों की कुल ताकत वाली चार टुकड़ियों के अलावा, लगभग 140 कर्मियों की कुल ताकत वाली दो और टुकड़ियां तिरुवनंतपुरम में स्टैंडबाय पर हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर तुरंत एयरलिफ्ट किया जाएगा। सेना एचएडीआर प्रयासों के समन्वय के लिए कोझिकोड में एक कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर स्थापित कर रही है। बचाव अभियान को सही दिशा में ले जाने के लिए हेलीकॉप्टर से प्रभावित क्षेत्र की जांच की जा रही है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। सेना द्वारा ऑपरेशन में ब्रिजिंग संसाधन जोड़े जा रहे हैं। बेंगलुरु से सड़क मार्ग और दिल्ली से हवाई मार्ग से लाया जाएगा।

 

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