अगर नाम जपने से भगवान मिल जाते तो हमें क्यों नहीं मिल रहे? प्रेमानंद जी महाराज ने दिया जवाब

अगर नाम जपने से भगवान मिल जाते तो हमें क्यों नहीं मिल रहे? प्रेमानंद जी महाराज ने दिया जवाब

Premanand Ji Maharaj: वृंदावन के प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन के लिए रोजाना देश-विदेश से सैंकड़ों श्रद्धालु उनके दरबार में पहुंचते हैं। प्रेमानंद जी महाराज अपने आश्रम में लोगों को भगवान के प्रति आस्था और लोगों के निजी जीवन से जुड़ी समस्याओं को हल करने का तरीका भी बताते हैं। श्रद्धालु प्रेमानंद जी महाराज के प्रवचन सुन उन्हें अपने जीवन में अपनाकर सुख की अनुभूति करते हैं।

ऐसे ही एक श्रद्धालु ने प्रेमानंद जी महाराज से पूछा कि यदि केवल एक नाम जपने से भगवान मिल जाते हैं, तो फिर हमें क्यों नहीं मिल रहे? इस पर महाराज जी ने जवाब दिया कि केवल एक नाम जपने से भगवान मिलना इतना आसान नहीं है। इसके लिए एकाग्रता, श्रद्धा, और विश्वास की जरूरत होती है। महाराज जी कहते हैं कि भगवान को प्राप्त करने के लिए हमें अपने जीवन को भगवान के लिए समर्पित करना होता है। इसी के साथ हमें अपने मन और शरीर को शुद्ध और स्वस्थ बनाने की आवश्यकता होती है।

भगवान के प्रति श्रद्धा रखें

महाराज जी यह भी कहते हैं कि जब हम नाम जपते हैं, तो हमें अपने मन को एकाग्र करना चाहिए। भगवान के प्रति श्रद्धा रखनी चाहिए। इसके अलावा महाराज जी बताते है हमें अपने जीवन में शांति और मधुरता को बनाए रखना चाहिए। क्योंकि इससे हमें भगवान की कृपा प्राप्त होती है। 

महाराज जी श्रद्धालु के सवाल का जवाब देते हुए कहते है कि अगर आप भगवान को प्राप्त करना चाहते है तो उसके लिए आपको अपने विचार, भावनाओं और कार्यों को शुद्ध करना होगा। 

जीवन को भगवान के लिए समर्पित करें

प्रेमानंद जी महाराज आगे बताते है कि भगवान को प्राप्त करने के लिए हमें निष्ठा और समर्पण के साथ उनका नाम जपना होगा। हमें अपने जीवन को भगवान के लिए समर्पित करना होगा। भगवान जो-जो हमसे कराए, उसे करो। महाराज जी कहते है कि भगवान को प्राप्त करने के लिए, हमें एक गुरु की शिक्षा की जरूरत होती है। क्योंकि गुरु हमें भगवान के बारे में बताता है, हमारा मार्गदर्शन करता है।

भगवान को प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक अभ्यासों का पालन करो। भगवान के नाम के साथ ध्यान, प्राणायाम, और योग करो। जिससे आपका दिमाग शांत रहे। अपने कर्मों को महत्व दें। हमें अपने कर्मों को सकारात्मक और नेक बनाना चाहिए।

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