Goldman Sachs Warning: दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर गोल्डमैन सैक्स ने एक अहम चेतावनी दी है। कंपनी की रिसर्च के मुताबिक, अगर ब्याज दरों में 1 फीसदी यानी 100 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी होती है, तो अगले साल विकसित देशों की अर्थव्यवस्था की विकास दर पर दबाव पड़ सकता है। इसके चलते इन देशों की GDP में 0.6 फीसदी तक की कमी आ सकती है। इसका असर घर खरीदने, लोगों के खर्च, कंपनियों के निवेश और सरकारों के कर्ज पर पड़ सकता है। भारत पर भी इसका अप्रत्यक्ष असर होने की आशंका है, खासकर निर्यात से जुड़े कारोबार पर।
चार क्षेत्रों पर पड़ेगा ब्याज दरों का असर
गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्रियों जोसेफ ब्रिग्स और जोहान एलन की रिसर्च में ब्याज दरें बढ़ने के प्रभाव का चार क्षेत्रों में अध्ययन किया गया है। इनमें आवास, आम लोगों का खर्च और कर्ज, कंपनियों का निवेश और सरकारों के कर्ज व घाटे शामिल हैं। ब्याज दरें बढ़ने पर होम लोन और दूसरे कर्ज महंगे हो सकते हैं। इससे लोगों की मासिक किस्त बढ़ेगी और खरीदारी के लिए उनके पास कम पैसा बचेगा। वहीं, कंपनियां नए कारखाने लगाने, मशीनें खरीदने और कारोबार बढ़ाने की योजनाओं को टाल सकती हैं।
कंपनियों के निवेश में आ सकती है गिरावट
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि ब्याज दरों में 1 फीसदी की बढ़ोतरी होने पर विकसित देशों में कंपनियों का निवेश औसतन 1.8 फीसदी घट सकता है। नीदरलैंड में यह गिरावट 3.5 फीसदी, स्वीडन में 3.1 फीसदी और जर्मनी में 2.1 फीसदी तक हो सकती है। अगर यूरोप की कंपनियां निवेश कम करती हैं, तो उन्हें मशीनें और दूसरे सामान देने वाली भारतीय कंपनियों के ऑर्डर भी प्रभावित हो सकते हैं। इससे उनकी कमाई पर दबाव पड़ सकता है।
भारत के इंजीनियरिंग निर्यात पर नजर
भारत के लिए यह चिंता इसलिए अहम है, क्योंकि इंजीनियरिंग सामान का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। EEPC इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में इंजीनियरिंग निर्यात सालाना आधार पर 18.21 फीसदी बढ़कर 46.38 अरब डॉलर पहुंच गया। एक साल पहले यह 39.24 अरब डॉलर था। हालांकि, गोल्डमैन सैक्स की यह रिसर्च विकसित अर्थव्यवस्थाओं पर आधारित है। इसमें भारत के निर्यात पर पड़ने वाले असर का सीधा अनुमान नहीं दिया गया है।
घर और सरकारी कर्ज पर भी बढ़ेगा दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्याज दरें बढ़ने से विकसित देशों में लोगों का खर्च औसतन 0.2 फीसदी घट सकता है। वहीं, अमेरिकी आवास निवेश में बॉन्ड यील्ड 1 फीसदी बढ़ने पर अगले एक से दो साल में करीब 8 फीसदी की गिरावट आ सकती है। सरकारों को भी पुराने कर्ज चुकाने और नए कर्ज लेने पर ज्यादा ब्याज देना पड़ सकता है। इससे सरकारी बजट पर दबाव बढ़ सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह एक अनुमान आधारित स्थिति है। गोल्डमैन सैक्स ने यह नहीं कहा है कि ब्याज दरें निश्चित रूप से 1 फीसदी बढ़ेंगी। रिपोर्ट बताती है कि अगर ऐसा होता है, तो विकसित देशों की अर्थव्यवस्था और भारत के निर्यात कारोबार पर किस तरह का असर पड़ सकता है।
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