Inflation Rise: देश में महंगाई ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सितंबर 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 9.92 प्रतिशत थी। ईंधन, खाने-पीने की चीजों और तैयार सामान की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण थोक महंगाई में यह उछाल देखने को मिला है। 14 अक्टूबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक, महंगाई दर अब दो अंकों में पहुंच गई है। थोक महंगाई दर को थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर मापा जाता है। यह बताता है कि बाजार में सामान बेचने वाले कारोबारियों और उत्पादकों के स्तर पर कीमतों में कितना बदलाव हुआ है। सितंबर में WPI बढ़कर 112.5 हो गया, जबकि अगस्त में यह 110.8 था। यानी एक महीने में इसमें करीब 1.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
ईंधन और बिजली की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल
सितंबर में थोक महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईंधन और बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी रही। इस क्षेत्र की महंगाई दर अगस्त के 22.9 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 25.9 प्रतिशत हो गई। कोयले और लिग्नाइट की महंगाई दर भी 1.6 प्रतिशत से बढ़कर 9.3 प्रतिशत पर पहुंच गई। वहीं, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई दर में बड़ा उछाल आया। यह अगस्त में 34.4 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 57.3 प्रतिशत हो गई। खनिज तेल की महंगाई दर भी 38.5 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत पर पहुंच गई। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर माल ढुलाई, उत्पादन और अन्य कारोबारों की लागत पर भी पड़ सकता है। इससे आगे चलकर कई वस्तुओं की कीमतें बढ़ने का खतरा रहता है।
तैयार सामान भी हुआ महंगा
थोक महंगाई में तैयार सामान की कीमतों का बड़ा योगदान है। WPI में इस श्रेणी की हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई है। अगस्त में तैयार सामान की महंगाई दर 8.4 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 9.8 प्रतिशत हो गई। बुनियादी धातुओं की महंगाई दर 10.9 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत पर पहुंच गई। वहीं, रसायन और रासायनिक उत्पादों की महंगाई दर भी 14.3 प्रतिशत से बढ़कर 16.7 प्रतिशत हो गई। इन वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर कई उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है।
खाने-पीने की चीजों की महंगाई भी बढ़ी
सितंबर में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर भी बढ़ी है। थोक खाद्य सूचकांक की महंगाई दर अगस्त के 7.1 प्रतिशत से बढ़कर 8.7 प्रतिशत हो गई। प्राथमिक खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 5.7 प्रतिशत से बढ़कर 8.1 प्रतिशत पर पहुंच गई। हालांकि, तैयार खाद्य उत्पादों की महंगाई दर में मामूली राहत मिली। यह अगस्त के 9.7 प्रतिशत से घटकर सितंबर में 9.4 प्रतिशत रही।
खुदरा महंगाई भी बढ़ने से बढ़ी चिंता
सितंबर में खुदरा महंगाई दर भी 5.5 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। कुछ अर्थशास्त्री इस साल आगे ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना का अनुमान लगा रहे हैं। हालांकि, ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर अभी कोई फैसला घोषित नहीं हुआ है। आने वाले समय में महंगाई का रुख और आर्थिक हालात इस पर असर डाल सकते हैं। लगातार बढ़ती थोक महंगाई से कारोबारियों की लागत बढ़ने और उसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने की आशंका बनी हुई है।
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