
नई दिल्ली: इस बार होली का त्योहार18 मार्च का मनाया जा रहा है। इससे पहले देशभर में 17 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। होली को लेकर बाजारों में रौनक देखने को मिल रही, चारों तरफ तरह-तरह के रंग, गुलाल और पिचकारियां देखने को मिल रही है। होली के दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर त्योहार मनाते हैं। होली के दिन तो ये रंग सभी को बहुत अच्छे लगते हैं, लेकिन रंगों से खेलने के बाद हमारे स्किन और शरीर पर कई तरफ के रिएक्शन हो जाते हैं। आज हम आपको होली के रंगों को लेकर कुछ ऐसी सावधानियों के बारे में बताने जा रहे है, जो होली के रंगों से आपको सुरक्षित रख त्योहार को और भी कलरफुल बना देंगे।
होली पर रगों को लेकर खासतौर पर ध्यान दिया जाना चाहिए। होली के दिन आपको किस तरह के रंगों को खरीदना चाहिए और होली के खतरनाक रंगों से अपने आपको कैसे बचाएं ये सारी बातें सभी को पता होनी।
कैमिकल वालों रंगों का स्किन पर बुरा असर
होली के कैमिकल रंग बाजारों में अलग-अलग तरीको के बिकते हैं। होली के दिन लगाए गए इन कैमिमल से भरपूर रंगों का हमारे स्किन पर काफी रिएक्शन होता है। यह कैमिकल वाले रंग हमारी त्वचा पर काफी बुरा असर ड़ालते हैं।
कैमिकल रंगों की पहचान कैसे करें
रगों को खरीदते समय ध्यान देना चाहिए कि हमे कैमिकल रगों से बचने के लिए हर्बल रगों को खरीदना चाहिए। कैमिकल वाले रंगों से बचने के लिए यह जानना जरूरी हैं कि केमिकल वाले रगों की पहचान क्या है। होली के मौके पर बाजारों में बिकने वाले कैमिकल रंग काफी चमकीले दिखते हैं। यह चमकीलापन रंगों में अलग से ही नजर आ जाता हैं। इन रंगों में काफी स्पार्कल होता हैं। हालांकि इन रंगों की पहचान करना थोड़ा मुश्किल होता क्योंकि कैमिकलयुक्त ये रंग देखने और छूने में काफी नैचुरल ही दिखने हैं।
हर्बल रगों को खरीदते समय सबसे पहले रंग की पैकेजिंग को अच्छे से जांच ले। रंग के पैकेट पर एक्सपाइरी डेट (Expiry Date)लिखा होना बहुत ही जरूरी होता हैं, क्योंकि कई दुकानदार रंग को पिछली होली के बचे हुए रंग भी बेचने लगते हैं। इसके अलावा रगों के पैकेट पर रंग बनाने में उपयोग हुई वाली सामग्री को अच्छे से ध्यान से पढ़े। अगर उस रंग की उपयोग की जाने वाली सामग्री में लिखा हो कि यह रंग का निर्माण गुलाब और हल्दी जैसी सामग्री को लेकर किया हो तो वह कलर असली व नैचुरल होगा। नैचुरल कलर में प्राकृतिक चीजों जैसी सामग्री का ही उपयोग हो।
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