
One Nation One Election News: बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने “एक देश एक चुनाव”को मंजूरी दे दी। जिसके बाद इसकी चर्चा चारो ओर हो रही है। कांग्रेस, सपा और राजद जैसी दलों ने इसका विरोध करना शुरु कर दिया है। उन्होंने “एक देश एक चुनाव”की खामियां बतानी शुरु कर दी है। वहीं, भाजपा और उनके समर्थक दलों के इस मुद्दे की सकारात्मक बातें बताई जा रही हैं। इस बीच यह भी ध्यान रखने योग्य है कि अभी ये बिल सिर्फ कैबिनेट से पास हुआ है। इसके आगे कई चुनौतियां सरकार के सामने आएगी। केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में इस बिल को लाएगी। उससे पहले भाजपा के कुछ नेता, उन दलों के मुखिया से मिलेंगे और उनको समझाने की कोशिश करेंगे, जो “एक देश एक चुनाव”का विरोध कर रहे हैं।
सरकार को आएगी कई चुनौतियां
“एक देश एक चुनाव”को लागू करने में सरकार के समक्ष कई अरचनें हैं। दरअसल, कोविंद कमेटी ने कुल 19 संवैधानिक संशोधनों की सिफारिश की है। यानी इसे लागू करने के लिए इन तमाम संशोधनों को संसद के दोनों सदनों से पास करवाया जाएगा। इसके अलावा कुछ ऐसे संशोधन भी है, जिसको विधानसभाओं से पास करवाना पड़ेगा। मौजूदा समय में एनडीए को 543 सदस्यीय लोकसभा में 293 व राज्यसभा में 119 सदस्यों का समर्थन है। हालांकि, कुछ संशोधन के लिए सदन के एक तिहाई सांसदों की सहमती चाहिए होगी। अगर संविधान संशोधन का प्रस्ताव होने वाले दिन लोकसभा में कुल मौजूद सदस्यों की संख्या 543 है, तो इस प्रस्ताव को पास करवाने के लिए 362 सदस्यों का समर्थन चाहिए होगी। ऐसे ही राज्यसभा में 245 में से 164 सदस्यों की सहमति चाहिए होगी। यही कारण है कि भाजपा के कई बड़े नेता, बिल का विरोध करने वाली पार्टियों के प्रमुख से मिलकर समर्थन के लिए राजी करने की कोशिश करेंगे।
इन समस्याओं का भी करना होगा सामना
इन सबके अलावा “एक देश एक चुनाव”लागू होने के बाद कई कठिनाईयों का सामना सरकार और चुनाव आयोग को करना पड़ सकता है। खासकर शुरुवाती दौर में मैनपावर की समस्या आ सकती है। इसके अलावा बजट के एक बड़ा हिस्सा EVM खरीदने में खर्च करना होगा। देशभर में एकसाथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव साओथ करवाने के लिए पर्याप्त EVM हासिल करने के लिए चुनाव आयोग को कम से कम चार साल देना होगा। EVM की लाइफ अधिकतम 15 सालों तक ही हो सकती है। जो EVM आज हर साल 2-3 बार इस्तेमाल होता है। वो पांच सालों में मात्र एक बार ही इस्तेमाल हो सकता है। हर 15 सालों में इतनी बड़ी संख्या में EVM खरीदना होगी। हालांकि, गौर देने वाली बात ये है कि लॉ कमीशन की माने तो धीरे-धीरे चुनाव पर आने वाले एक्स्ट्र खर्च खत्म हो जाएगा।
विपक्ष क्यों कर रहा विरोध
कांग्रेस, आप, सपा समेत कई दलों ने इसका विरोध किया है। कई क्षेत्रीय दलों का मानना है कि “एक देश एक चुनाव”लागू होने के बाद उनका प्रभुत्व खत्म हो जाएगा। क्योंकि लोग देश के मुद्दों पर वोट करेंगे और इसके लिए राष्ट्रीय दल को वोट करेंगे और जिससे नुकसान क्षेत्रीय दलों को होगा। इसके अलावा कांग्रेस ने इसे संविधान के विरुद्ध बताया है। साथ ही कांग्रेस का मानना है कि एक देश एक चुनाव लोकतंत्र के खिलाफ भी है। वहीं, कई अन्य दलों के मन में अन्य प्रकार के शंकाएं हैं।
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