
नई दिल्ली: होली का त्योहार करीब है. इस बार होली 9 मार्च को मनाई जाएगी. रंगों के इस त्योहार में रंगों से सराबोर होना किसी पसंद नहीं. वैसे तो इस बार होली पर्व पर कोरोना वायरस का साया मंडरा रहा है फिर भी होली का उत्साह कम नहीं हुआ है. लोग होलिका दहन की तैयारियों में जुट गए हैं. क्योंकि होलिका दहन के बाद ही होली का त्योहार आरंभ माना जाता है. हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात को प्रदोष काल में होलिका दहन किया जाता है. होलिका दहन की अग्नि को पवित्र माना जाता है. कहीं-कहीं तो लोग इस आग में नई फसल को भूनकर प्रसाद के रूप में ग्रहण भी करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि होलिका दहन का इस बार मुहूर्त क्या है. तो चलिए हम बताए देते हैं.
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
तिथि 9 मार्च 2020
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ 9 मार्च 2020 को सुबह 3 बजकर 3 मिनट से रात 11 बजकर 17 मिनट तक
अतः होलिका दहन का मुहूर्त शाम 6 बजकर 26 मिनट से रात 8 बजकर 52 मिनट तक है.
पूजा विधि को जानें
होलिका दहन के शुभ मुहूर्त से में श्रद्धापूर्वक होली के चारों ओर परिक्रमा करते हुए सूत के धागे को लपेटते हुए चलें. परिक्रमा तीन या सात बार करें. एक-एक कर सारी पूजन सामग्री होलिका में अर्पित करें. जल से अर्घ्य दें साथ ही घर के सदस्यों को तिलक लगाएं. घर के देवी-देवताओं को अबीर-गुलाल अर्पित करें. घर के बड़े सदस्यों को रंग लाकर उनका आशीर्वाद जरूर लेना चाहिए.
अच्छाई की बुराई पर पराजय का प्रतीक
होली भारतीय परंपरा का प्रमुख त्योहार है, यह त्योहार भी बुराइयों को दूर कर भलाई की स्थापना की प्रतीक है. इसीलिए होलिका दहन किया जाता है जिसके बारे में सभी जानते ही होंगे. इस त्योहार का खास महत्व यही है कि मजबूत इच्छाशक्ति के आगे बुराई हमेशा पराजित होती है. पुराणों में बताया गया है कि कैसे प्रह्लाद ने अपनी अगाध भक्ति से भगवान नारायण को प्रसन्न किया था और उसके पिता का प्रह्लाद को समाप्त करने का हर प्रयास असफल हुआ. प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्य की बहन जो कि अग्नि में प्रह्लाद को जलाना चाहती थी लेकिन वरदान के बावजूद वह खुद ही जलकर भस्म हो गई थी.
होलिका दहन की तैयारी के लिए खास तौर पर गाय के गोबर के कंडे या उपले, सखी लकड़ियां, घास-फूस इकट्ठे किए जाते हैं. इसे सामग्री को होलिका पूजन कर जला दिया जाता है. दहन के पूर्व होलिका का पूजन जल, पुष्प, अक्षत, माला, रोली, गुड़, नारियल, कच्चा सूत, बताशा आदि सामग्री जोड़कर इसका पूजन किया जाता है.
सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि भद्रा नक्षत्र में होलिका दहन न हो भद्रा रहित नक्षत्र में ही होलिका दहन किया जाता है. तो इस बार होलिका दहन पर सभी बुराइयों को भस्म कीजिए और अपने घर, परिवार, देश, समाज को एक नई दिशा में सहयोग कीजिए.
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