
CBI InvestigationFor Kolkata Rape Murder Case: कोलकता के मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार के बाद हत्या करने के मामले में हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। उन्होंने अब इस मामले की जांचCBI को दे दी है। साथ ही कोर्ट ने पुलिस को बुधवार सुबह 10 बजे तक सभी दस्तावेजCBIको सौंपने का निर्देश दिया है। इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सोमवार को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की बात कही थी। उन्होंने पुलिस को 10 दिनों का समय दिया था। हालांकि, इससे पहले ही कोलकता हाई कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है। बता दें, लगातार दूसरे दिन भी डॉक्टरों का हड़ताल जारी है। देशभर के डॉक्टरों में भारी गुस्सा देखने को मिल रही है।
प्रिसिंपल को कोर्ट ने लगाई थी फटकार
इस घटना पर कई जनहित याचिकाएं दायर की गई थी। इन तमाम याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश टीएस शिवागनानम ने पश्चिम बंगाल सरकार से कई सवाल पूछे हैं। इस बेंच में न्यायमूर्ति हिरणमय भट्टाचार्य भी शामिल हैं।कोर्ट ने कहा कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए किसी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था तो आखिर किस आधार पर उसकी नियुक्ति किसी अन्य कॉलेज में की गई। साथ ही कोर्ट ने प्रिसिंपल संदीप घोष को छुट्टी के लिए आवेदन दर्ज करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो अदालत उन्हें पद छोड़ने का आदेश दे सकती है। कोर्ट ने प्रिसिंपल के बयान दर्ज करने का सवाल जब पूछा तो सरकार के वकील ने ना में जवाब दिया था।
डॉक्टरों ने रखी ये मांगे
हड़ताल पर बैठे रेजिडेंट डॉक्टरों ने सरकार के सामने कई मांगे रखी है। उन्होंने बिना किसी देरी के महिला डॉक्टर से हुए कुकृत्य की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपने को कहा है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल, एमएस के साथ ही अस्पताल के सिक्योरिटी इंचार्ज को इस्तीफा देने को कहा है। हालांकि, सोमवार को ही भारी विरोध के कारण आरजी मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके साथ ही डॉक्टरों ने पीड़ित महिला रेजिडेंट डॉक्टर के लिए पर्याप्त मुआवजा देने के साथ ही किसी भी मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग या लाइब्रेरी का मृतक डॉक्टर के नाम पर रखा जाए। इसके साथ ही सरकार से यह मांग की गई है कि वो जल्द ही डॉक्टरों के सुरक्षा के लिए सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लेकर आए। इसके अलावा डॉक्टरों के खिलाफ होने वाले शारिरिक हमलों के खिलाफ पुलिस द्वारा सख्त कार्रवाई करने की मांग रखी है। ऐसा देखा गया है कि पिछले लंबे समय से डॉक्टरों से हिंसा के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है।
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