मंकीपॉक्स के साथ टोमेटो फ्लू ने पसारे अपने पैर, बच्चों में बढ़ रहा है खतरनाक वायरस

मंकीपॉक्स के साथ टोमेटो फ्लू ने पसारे अपने पैर, बच्चों में बढ़ रहा है खतरनाक वायरस

नई दिल्ली: मंकीपॉक्स ने दुनिया के 70 देशों में अपने पैर पसार लिए है। मंकीपॉक्स के 15,000 से अधिक मामले  देशों में दर्ज किए गए हैं जहां पहले इस बीमारी को नहीं देखा गया। भारत में भी अब तक इसके तीन मामले सामने आए हैं। लेकिन मंकीपॉक्स के बाद टोमैटो वायरस के मामले बढ़ते जा रहे है। इतना ही नहीं बड़ों में कम बच्चों को इस बीमारी ने घेर लिया है।

हाल ही में केरल में टोमैटो फीवर का प्रसार देखा गया है। ये एक फ्लू है जो ज्यादातर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। पिछले सप्ताह तक कोल्लम जिले के एक छोटे से हिस्से में ये वायरस फैला है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि राज्य में अब तक टोमैटो फीवर संक्रमण के 80 मामले दर्ज किए गए हैं।

क्या है टोमैटो फ्लू

टोमैटो फ्लू एक रेयर वायरल बीमारी है। इससे संक्रमित होने पर शरीर पर लाल रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं, स्किन में जलन होती है और डिहाइड्रेशन की समस्या आती है। इस बीमारी में शरीर पर लाल रंग के छाले जैसे बन जाते हैं, जो टमाटर जैसे दिखते हैं, इसलिए इसका नाम टोमैटो फ्लू पड़ा है।

टोमैटो फ्लू के लक्षण

टोमैटो फ्लू में चिकनगुनिया जैसे लक्षण ही दिखाई दे रहे हैं इससे संक्रमित होने पर तेज बुखार, शरीर में दर्द, जोड़ों में सूजन और थकान होती है। हालांकि, इससे संक्रमित बच्चों में त्वचा में जलन और चकत्ते भी पड़ रहे हैं, जिससे शरीर के कुछ हिस्सों पर छाले पड़ जाते हैं। इससे संक्रमित होने पर पेट में ऐंठन, उल्टी या दस्त की शिकायत भी होती है। इसके साथ ही हाथ और घुटनों के अलावा शरीर के कुछ हिस्सों का रंग भी बदल जाता है।

इससे संक्रमित होने पर पेट में ऐंठन, उल्टी या दस्त की शिकायत भी होती है। स्वास्थ्य अधिकारी अभी भी टोमैटो फ्लू के सही कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

इससे बचने के तरीका

बताया जा रहा है कि ये बीमारी नई है और अभी तक इसके बारे में ज्यादा जानकारी मौजूद नहीं है,  इसलिए इसका कोई पुख्ता इलाज नहीं है। संक्रमण से बचने के लिए अपने आसपास साफ-सफाई को बनाए रखें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। पानी पीते रहें।

इसके अलावा अगर कोई भी लक्षण दिखता है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। अगर बच्चों में संक्रमण है तो उन्हें छालों को खुजाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे बात और बिगड़ सकती है।

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