HARYANA NEWS: यमुनानगर में सच्चाई दिखाने की मिली सजा, अवैध खनन उजागर करने पर पत्रकारों की बेरहमी से की गई पिटाई

HARYANA NEWS: यमुनानगर में सच्चाई दिखाने की मिली सजा, अवैध खनन उजागर करने पर पत्रकारों की बेरहमी से की गई पिटाई

HARYANA NEWS: हरियाणा के यमुनानगर से इस वक्त एक बेहद चिंताजनक और लोकतंत्र को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जहां अवैध खनन माफिया के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब उन्होंने पत्रकारों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया है और यमुनानगर में अवैध खनन की कवरेज करने जा रहे दो पत्रकारों की जमकर पिटाई कर दी, जिसके चलते पूरे पत्रकार समाज में रोशन  पैदा हो चुका है।

मामला यमुनानगर के प्रताप नगर क्षेत्र के कोहलीवाले गांव का है, जहां अवैध खनन की सच्चाई सामने लाने पहुंचे दो तथाकथित पत्रकारों पर खनन माफिया से जुड़े लोगों ने हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि जैसे ही ये पत्रकार खनन जोन की ओर बढ़े, रास्ते में ही उन्हें रोक लिया गया और उनके साथ जमकर मारपीट की गई।

पीड़ित पत्रकारों का आरोप है कि हमलावरों ने न केवल उनके साथ बेरहमी से मारपीट की, बल्कि जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उनका अपमान भी किया। यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज में बढ़ती दबंगई और असहिष्णुता को भी उजागर करती है। पत्रकारों ने ज़ब जब सच्चाई दिखाई, तो उन पर  ब्लैकमेलिंग के आरोप  लगते रहे।

हमले में शामिल एक व्यक्ति खुद को गांव का सरपंच बता रहा था। उसने पहले पत्रकारों को खनन क्षेत्र में जाने  से रोका और जब उन्होंने अपनी ड्यूटी का हवाला देते हुए कवरेज की बात कही, तो उन पर हमला कर दिया गया। यह साफ दर्शाता है कि अवैध खनन में शामिल लोग अब सच्चाई सामने आने से इतने डर चुके हैं कि वे कानून को हाथ में लेने से भी नहीं डर रहे।

गौरतलब है कि हाल ही में इन पत्रकारों में से एक पत्रकार लगातार अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ खबरें प्रकाशित कर रहा था, जिसमें प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए थे। इसी के चलते अब पत्रकारों को डराने और चुप कराने की कोशिश की जा रही है।लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों पर इस तरह का हमला बेहद गंभीर मामला है। यदि सच्चाई दिखाने वालों की आवाज दबाई जाएगी, तो आम जनता तक सही जानकारी कैसे पहुंचेगी?

फिलहाल पुलिस ने मामले में शिकायत दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या प्रशासन खनन माफिया पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अवैध खनन माफिया के हौसले बुलंद हैं और अगर समय रहते इन पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो पत्रकारिता और कानून व्यवस्था दोनों के लिए यह खतरे की घंटी बन सकता है।

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