हरियाणा में क्या है भाजपा का जीटी रोड का जादू, जिसे तोड़ने के लिए राहुल गांधी ने ली जिम्मेदारी

हरियाणा में क्या है भाजपा का जीटी रोड का जादू, जिसे तोड़ने के लिए राहुल गांधी ने ली जिम्मेदारी

Haryana Elections: हरियाणा में चुनावी माहौल गर्म हो गया है और यह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। 2014 में पार्टी ने पहली बार अपने दम पर हरियाणा की सत्ता संभाली। इसके बाद 2019 में भी बीजेपी ने जेजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई।अब 10 साल बाद बीजेपी को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि इस बार का चुनाव बीजेपी के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, हालांकि जीटी रोड से जुड़े इलाकों में पार्टी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।

राहुल गांधी की सक्रियता,कांग्रेस की नई रणनीति

इस चुनौतीपूर्ण समय में कांग्रेस ने राहुल गांधी को आगे लाने का फैसला किया है। उन्होंने सोनीपत से अंबाला तक फैली जीटी रोड बेल्ट पर ध्यान केंद्रित किया है। राहुल गांधी ने अपनी विजय संकल्प यात्रा की शुरुआत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के गढ़ नारायणगढ़ से की। यात्रा कुरूक्षेत्र में समाप्त हुई और इस दौरान 10 विधानसभा सीटों को कवर किया गया। चर्चा है कि 3 अक्टूबर को राहुल गांधी फिर उसी इलाके के दौरे पर जा सकते हैं, जिससे उनकी रणनीति और मजबूत होगी।

जीटी रोड बेल्ट में कांग्रेस की स्थिति

हरियाणा की जीटी रोड बेल्ट के सोनीपत में कांग्रेस की स्थिति मजबूत मानी जाती है, जहां जाटों की संख्या अधिक है। वहीं, पानीपत, करनाल, कुरूक्षेत्र और अंबाला में बीजेपी को ताकत मिली है, क्योंकि इन इलाकों में जाटों की संख्या कम है। यह बेल्ट ब्राह्मण, बनिया, पंजाबी, सैनी और अन्य ओबीसी जातियों से भरी है, जिसमें बीजेपी की मजबूत पकड़ है। 2014 में बीजेपी ने इस क्षेत्र की 23 में से 21 सीटें जीती थीं और 2019 में भी 12 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 9 सीटों से संतोष करना पड़ा।

अहीरवाल क्षेत्र में भाजपा की उम्मीदें

जीटी रोड बेल्ट की तरह अहीरवाल क्षेत्र से भी भाजपा को बड़ी उम्मीदें हैं। इस क्षेत्र में गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और भिवानी शामिल हैं, जहां यादव और ब्राह्मणों की अच्छी संख्या है। कांग्रेस में जाटों का झुकाव बढ़ रहा है, लेकिन ध्रुवीकरण की स्थिति में अन्य जातियां बीजेपी की ओर रुख कर सकती हैं। इसके लिए बीजेपी की रणनीतियां सक्रिय हैं और इस बेल्ट में कुल 12 सीटें आती हैं।

हरियाणा में आगामी चुनावों को लेकर सियासी पारा लगातार बढ़ता जा रहा है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि इस चुनाव में जनता का मूड किस तरफ जाएगा।

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