Haryana News: हरियाणा सरकार ने पराली जलाने, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रयास और तेज कर दिए हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष राजेश वर्मा और हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आज यहां हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में इन उपायों की समीक्षा की गई। बैठक में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रदेशभर में की जा रही पहलों और प्रवर्तन उपायों की प्रगति की समीक्षा की गई।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग निदेशक अमित खत्री ने बताया कि प्रदेश में फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के वितरण के लिए निर्धारित 9,000 मशीनों के लक्ष्य के मुकाबले 13,200 मशीनें वितरित की जा चुकी हैं, जो निर्धारित लक्ष्य से 47 प्रतिशत अधिक है। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए इस वर्ष अब तक 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अतिरिक्त, 10,000 रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा वसूल किया गया है। पराली जलाने से संबंधित मामलों में किसानों के राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी की गई हैं।
प्रदेश में गांव स्तर पर पराली जलाने की घटनाओं की पुष्टि के लिए नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) द्वारा विकसित मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है। इससे उपग्रह आधारित आंकड़ों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी करने में मदद मिल रही है। धान के अवशेषों को उपयोगी संसाधन के रूप में बढ़ावा देने के लिए वर्तमान सीजन के दौरान 27.10 लाख मीट्रिक टन धान के अवशेषों के औद्योगिक उपयोग हेतु जिला स्तर पर समझौते किए गए हैं।
बैठक में बताया गया कि 30 सितंबर तक बायोमास आधारित बिजली परियोजनाओं में 7.284 लाख मीट्रिक टन धान की पराली का उपयोग किया जा चुका है, जो उनके वार्षिक लक्ष्य का 77.16 प्रतिशत है। वहीं, कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्रों में भी 1.053 लाख मीट्रिक टन पराली का उपयोग किया गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार आ रही गिरावट के लिए हरियाणा सरकार की सराहना की। उन्होंने फसल अवशेष जलाने की प्रवृत्ति को रोकने तथा पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
वर्मा ने झज्जर जिला प्रशासन द्वारा बादली क्षेत्र में विकसित मॉडल ईंट भट्ठे की भी सराहना की, जहां धान की पराली का ईंधन के रूप में प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने इस पहल को कृषि अवशेषों को उपयोगी संसाधन में बदलने का व्यावहारिक उदाहरण बताते हुए कहा कि इस तरह के नवाचार पराली जलाने और वायु प्रदूषण को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं। उन्होंने ऐसे टिकाऊ उपायों को व्यापक स्तर पर अपनाने तथा जिला प्रशासन और औद्योगिक इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया।
बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से बाहर के आठ जिलों में ईंट भट्ठों में धान की पराली से बने पेलेट्स का ईंधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है। इनमें औसतन 21.9 प्रतिशत को-फायरिंग दर दर्ज की गई है। इन जिलों के कुल 708 ईंट भट्ठों में से 707 को निर्धारित मानकों के अनुपालन के दायरे में लाया जा चुका है।
ताप विद्युत संयंत्रों में भी कोयले के साथ बायोमास के मिश्रण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर स्टेशन ने अपने को-फायरिंग लक्ष्य का 72.89 प्रतिशत हासिल कर लिया है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष शेखर विद्यार्थी ने बताया कि वायु प्रदूषण और पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी को मजबूत करने के लिए राज्य के चिह्नित रेड जोन वाले गांवों में पीएम2.5 के 79 सेंसर लगाए गए हैं।
निगरानी के पहले चरण में 20 ड्रोन तैनात किए गए हैं, जबकि 30 और ड्रोन तैनात करने की योजना है। इन उपायों से प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी करने और पराली जलाने की घटनाओं की अधिक प्रभावी ढंग से पहचान करने में मदद मिलेगी। हरियाणा सरकार ने ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) कैमरों की खरीद के लिए 14.50 करोड़ रुपये की लागत से 600 कैमरों की खरीद को मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त, 1,500 और कैमरों की खरीद के लिए अलग से टेंडर जारी किया गया है। प्रस्तावित प्रवर्तन उपायों के तहत राज्य के एनसीआर जिलों में वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के बिना वाहनों को पेट्रोल पंपों और सीएनजी स्टेशनों पर ईंधन उपलब्ध नहीं कराने की व्यवस्था लागू करने का भी प्रस्ताव है।
इस वर्ष जनवरी से अक्टूबर के मध्य तक हरियाणा यातायात पुलिस ने निर्धारित आयु-सीमा पूरी कर चुके 19,067 वाहनों को जब्त किया है, जिनमें से 785 वाहनों को स्क्रैपिंग के लिए भेजा गया है। परिवर्तन योजना के तहत पुराने व्यावसायिक ट्रकों और बसों को स्वच्छ बीएस-6, इलेक्ट्रिक या सीएनजी वाहनों से बदलने के लिए 18,501 लाभार्थियों ने पंजीकरण कराया है।
राज्य के एनसीआर जिलों में डीजल से चलने वाले 596 ऑटो रिक्शा को भी चरणबद्ध तरीके से हटाया गया है। जनवरी 2023 से नए डीजल ऑटो रिक्शा के पंजीकरण पर रोक है। यातायात जाम और उससे होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए 84 ऐसे स्थानों पर अल्पकालिक उपाय किए गए हैं, जहां तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता थी। इसके अतिरिक्त, 10 स्थानों पर दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कदम उठाए गए हैं। स्वचालित प्रवर्तन को प्रभावी बनाने के लिए इन स्थानों पर कुल 205 एएनपीआर कैमरे लगाए गए हैं। सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, मानेसर, करनाल, पानीपत और रोहतक में 748.89 किलोमीटर सड़कों का पुनर्विकास किया गया है। इसके अलावा, 81 की आवश्यकता के मुकाबले 78 मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें तैनात की गई हैं। इन सात शहरों में निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) मलबे के लिए सभी 44 सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। मलबा एकत्र करने के लिए जीपीएस-सक्षम वाहनों को भी तैनात किया गया है। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली इमारतों के 56 भवन नक्शे डस्ट पोर्टल पर पंजीकृत किए गए हैं।
नगर निकायों को धूल नियंत्रण संबंधी उपायों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें वीडियो निगरानी, हर पखवाड़े स्व-मूल्यांकन, कम लागत वाले वायु गुणवत्ता सेंसर, हवा रोकने वाले अवरोधक, धूलरोधी पर्दे, पानी के छिड़काव तथा निर्माण सामग्री की ढककर ढुलाई सुनिश्चित करना शामिल है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव योगेश कुमार ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए औद्योगिक इकाइयों के निरीक्षण तेज किए गए हैं। जनवरी से सितंबर के बीच बोर्ड ने मानकों के अनुरूप निर्धारित क्षेत्रों में 4,129 और गैर-अनुरूप क्षेत्रों में 462 औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया। नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है, जिसमें इकाइयों को बंद करना भी शामिल है।
191 स्टोन क्रशर इकाइयों ने वेब कैमरे या वीडियो निगरानी प्रणाली स्थापित की है, जबकि 293 इकाइयों में कम लागत वाले पार्टिकुलेट मैटर सेंसर लगाए गए हैं। कुल 708 स्टोन क्रशर इकाइयों में से 707 को धूल नियंत्रण संबंधी शर्तों के साथ संशोधित संचालन सहमति जारी की गई है। डीजल जनरेटर (डीजी) सेट से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण के लिए भी कार्रवाई की गई है। निरीक्षण करने के बाद, 2,978 डीजी सेटों में से मानकों का अनुपालन नहीं करने वाली 153 इकाइयों को बंद कराया गया है।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के सदस्य सचिव तरुण कुमार पिथोड़े ने कहा कि धान की पराली को उपयोगी आर्थिक संसाधन में बदलने और उसके बेहतर प्रबंधन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आयोग का प्रयास पंजाब और हरियाणा में ऐसा तंत्र विकसित करने का है, जिसमें पराली जलाने की घटनाओं को रोका जा सके और फसल अवशेष का उत्पादक उपयोग हो।