Haryana News: हरियाणा में बिजली निगम कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। गुरूग्राम में करीब 40 प्रतिशत हिस्से में बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हो गए कि घरों में बिजली के साथ-साथ पेयजल का संकट भी खड़ा हो गया। 24 घंटे तक बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं होने पर लोगों का सब्र जवाब दे गया और गुस्साए लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
दौलताबाद फ्लाईओवर के पास भीमगढ़ खेड़ी क्षेत्र के लोगों ने सड़क पर बैठकर जाम लगा दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बिजली निगम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बिजली और पानी की आपूर्ति जल्द बहाल करने की मांग की। लोगों का कहना था कि लंबे समय से बिजली नहीं होने के कारण रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। पीने के पानी तक के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।
जाम की सूचना मिलने के बाद स्थानीय थाना पुलिस और एसीपी स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और यातायात बहाल कराने का प्रयास किया, लेकिन लोग तत्काल बिजली-पानी की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग पर अड़े रहे। काफी देर तक चली बातचीत और मशक्कत के बाद पुलिस लोगों को समझाने में सफल रही और जाम खुलवाया गया। राहत की बात यह रही कि जाम के कुछ समय बाद इलाके के कुछ हिस्सों में बिजली आपूर्ति फिर से शुरू हो गई, लेकिन कई क्षेत्रों में बिजली बहाल नहीं होने से लोगों की परेशानी बनी हुई है।
बिजली संकट के विरोध में सड़क जाम किए जाने का असर केवल प्रदर्शन स्थल तक सीमित नहीं रहा। रेलवे रोड और दौलताबाद रोड समेत राजेंद्रा पार्क तथा आसपास के इलाकों में भी यातायात प्रभावित हुआ। सड़कों पर वाहनों की कतारें लगने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। एक तरफ बिजली-पानी की किल्लत से लोग परेशान रहे, तो दूसरी तरफ जाम के कारण शहर की सड़कों पर भी लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
दरअसल, बिजली निगम के कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में बुधवार रात करीब 10 बजे से हड़ताल शुरू कर दी थी। इसके बाद शहर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। बताया जा रहा है कि इसका असर गुरुग्राम के करीब 40 प्रतिशत हिस्से पर पड़ा। बिजली गुल होने से घरों में पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई, क्योंकि कई जगह पानी की व्यवस्था बिजली पर निर्भर है।
बिजली निगम के कार्यालयों में शिकायतों का सिलसिला भी लगातार जारी रहा। बुधवार देर रात से वीरवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे तक ही 3,000 से अधिक शिकायतें मिलने की जानकारी सामने आई। अधिकारियों के अनुसार, देर शाम तक शिकायतों की संख्या 10,000 से अधिक हो गई थी। शिकायत केंद्रों पर लगातार फोन आने के कारण बड़ी संख्या में लोगों की शिकायतें दर्ज कराने में भी दिक्कत हुई। कई लोग बिजली निगम के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें तत्काल राहत नहीं मिल सकी।
बिजली संकट को लेकर रिहायशी सोसायटियों और कॉलोनियों के लोगों में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है। न्यू पालम विहार आरडब्ल्यूए की प्रधान किरण कांडपाल ने आरोप लगाया कि बिजली निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की वजह से क्षेत्र में जानबूझकर बिजली आपूर्ति बाधित की गई है। उनका कहना है कि जनता को परेशानी में डालकर सरकार पर मांगें मानने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब लोग बिजली-पानी के लिए परेशान हैं, तो जिला प्रशासन की ओर से प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे।
स्थानीय निवासियों की परेशानी बनी
वहीं, सेक्टर-5 आरडब्ल्यूए के प्रधान दिनेश वशिष्ठ ने बताया कि उनके क्षेत्र में भी बुधवार रात से बिजली आपूर्ति बाधित थी। काफी प्रयासों के बाद कुछ हिस्सों में बिजली आई, लेकिन पूरे इलाके में आपूर्ति सामान्य नहीं हो पाई। इससे स्थानीय निवासियों की परेशानी बनी हुई है।
गुरुग्राम में बिजली संकट अब केवल बिजली कटौती तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर पेयजल आपूर्ति, घरेलू कामकाज और सड़क यातायात तक पहुंच गया है। शिकायतों की बढ़ती संख्या और बिजली बहाल होने में हो रही देरी के बीच लोगों का आक्रोश भी बढ़ रहा है। भीमगढ़ खेड़ी में जाम और प्रदर्शन इसी नाराजगी का उदाहरण है।
कई हिस्सों में आपूर्ति सामान्य नहीं होने की शिकायतें हैं
कुछ इलाकों में बिजली लौटने के बावजूद शहर के कई हिस्सों में आपूर्ति सामान्य नहीं होने की शिकायतें हैं। ऐसे में लोगों की सबसे बड़ी मांग यही है कि बिजली व्यवस्था जल्द दुरुस्त की जाए, पेयजल की सप्लाई बहाल हो और प्रशासन उन्हें केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस राहत उपलब्ध कराए।