Haryana News: हरियाणा के हिसार जिले में लोगों को रकम कई गुना करने का झांसा देकर ठगी करने वाले एक गिरोह का उकलाना पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। आरोप है कि गिरोह ने करीब चार लाख रुपये की ठगी को अंजाम देने के लिए पुलिस का फर्जी रूप धारण किया और पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया कि उनकी रकम पुलिस ने जब्त कर ली है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक आरोपी फर्जी पुलिस वर्दी पहनकर वारदात में शामिल बताया जा रहा है।
मामला हिसार के गांव प्रभुवाला में लितानी मोड़ के पास का बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने लोगों को उनकी रकम कुछ ही समय में कई गुना करने का लालच दिया। इसके बाद योजना के तहत उनसे करीब चार लाख रुपये ठग लिए गए। ठगी की साजिश को अंजाम देने के लिए गिरोह ने बाकायदा पुलिस का माहौल तैयार किया। एक आरोपी ने कथित तौर पर पुलिस की वर्दी पहन रखी थी, जबकि एक वाहन को भी इस तरह इस्तेमाल किया गया, जिससे वह पुलिस की गाड़ी नजर आए। इसके बाद पीड़ितों को डराकर यह भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि उनकी रकम पुलिस ने अपने कब्जे में ले ली है।
फर्जी पुलिसकर्मी पर हुआ शक
वारदात के दौरान आरोपी की गतिविधियों पर कुछ लोगों को संदेह हो गया। इसके बाद उन्होंने फर्जी पुलिसकर्मी का पीछा शुरू कर दिया और मामले की जानकारी उकलाना थाना पुलिस को दी।सूचना मिलते ही थाना प्रभारी कुलदीप सिंह और राजेश पातड़ को मामले से अवगत कराया गया। पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संदिग्धों की तलाश शुरू की।
प्रभुवाला में घेराबंदी कर 3 आरोपी पकड़े
पुलिस ने गांव प्रभुवाला में घेराबंदी कर गिरोह के तीन कथित सदस्यों को पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान उस वाहन को भी कब्जे में लिया गया, जिसका इस्तेमाल आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस वाहन के तौर पर किया था। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि ठगी की पूरी योजना और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश जारी
पुलिस की एक अन्य टीम गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए रवाना की गई है। जांच में ठगी की रकम की बरामदगी के साथ-साथ आरोपियों के नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने पहले भी इसी तरह पुलिस की फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को ठगा है। मामले में आगे की कार्रवाई पूछताछ और जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।