
Haryana Election: हरियाणा विधानसभा चुनाव के मतदान कल यानी 5अक्टूबर को हो चुके है। जिसके बाद एग्जिट पोल के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा झटका लगा है। एग्जिट पोल के नतीजों के अनुसार, हरियाणा में बीजेपी सत्ता से बाहर जाती दिख रही है। यानी कांग्रेस राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बना सकती है। जिसके चलते 10 साल से राज्य में चली आ रही बीजेपी की सरकार का सफर यहीं खत्म हो सकता है।
हरियाणा विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के नतीजों के अनुसार, कांग्रेस 10 साल बाद प्रदेष में दमदार वापसी कर सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस को 54 सीट, बीजेपी को 26, जेजेपी और आईएनएलडी को एक-एक सीट मिलती दिख रही है। हालांकि बीजेपी ने लोकसभा चुनाव से पहले हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री पद से हटाकर नायब सिंह सैनी को राज्य की जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन सीएम फेस बदलने के बाद भी बीजेपी सत्ता की हैट्रिक से केयों और कैसे दूर रह गई?
हरियाणा के जाटों ने पलटी बाजी
चुनाव में जाट हमेशा से बड़ा फैक्टर रहा है। पहले से ही जाट बीजेपी सरकार के काम से नाराज हैं। जिसकी झलक पहले लोकसभा चुनाव और अब एक्जिट पोल में भी साफ देखने को मिल सकती है।
सीएम फेस बदलने का दांव बेअसर
बीजेपी ने लोकसभा चुनाव से पहले हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री पद से हटाकर नायब सिंह सैनी को राज्य की जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन, बीजेपी का ये दांव पूरी तरह से फेल नजर आ रहा है। पार्टी के इस कदम को एंटी इन्कंबेसी को खत्म करने के रूप में देखा गया। हालांकि, पार्टी का यह दांव कामयाब होता नहीं दिख रहा हैप्रदेश सरकार को लेकर हरियाणा में लोगों की नाराजगी की खबरें लगातार आ रही थीं।
एंटी इनकमबेंसी
साल 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य की सत्ता में वापसी की थी। उस दौरान कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी थी। अब ऐसा ही हाल बीजेपी का भी देखने को मिल रहा है।
बीजेपी पर किसानों की नाराजगी भारी पड़ी
हरियाणा में बीजेपी सरकार के लिए किसानों की नाराजगी भी भारी पड़ी है। क्योंकि बीजेपी ने किसानों के खिलाफ बयानबाजी की है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार किसानों के मुद्दे पर सरकार बुरी तरह से असफल रही। जानकारों के अनुसार बीजेपी ने किसानों के आंदोलन को बिल्कुल असंवेदनशील तरीके से दबाने की कोशिश की।
पहलवानों के मुद्दे पर नाराजगी
बीजेपी की हार के पीछे महिला पहलवानों का मु्द्दा भी बड़ा फैक्टर बना जा रहा है। बीजेपी कुश्ती संघ के अध्यक्ष रहे सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर एक्शन लेने से बचती रहीष इसके साथ उनके बेटे को लोकसभा चुनाव में टिकट भी दिया गया। इसके अलावा बीजेपी ने विनेश फोगाट को लेकर जिस तरह से बयानबाजी की गई, उससे भी हरियाणा के लोग काफी नाराज दिखें।
अग्निवीर का मुद्दा भी बना कारण
अग्निवीर के मुद्दे पर पार्टी को प्रदेश के युवाओं की नाराजगी भी झेलनी पड़ी। राज्य में विरोधी दलों ने बीजेपी के खिलाफ अग्निवीर के मुद्दे को हवा दी। इसका असर बीजेपी के प्रदर्शन पर साफ दिखा।
भ्रष्टाचार का मुद्दा हुआ फेल
पार्टी ने कांग्रेस राज भ्रष्टाचार के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया था। बीजेपी के लिए यह भी कारगर साबित नहीं हुआ।
परिवारवाद का मुद्दा नहीं आया काम
बीजेपी ने परिवारवाद का मुद्दा उठाया और हुड्डा परिवार को निशाना बनाया। बीजेपी के नेता मंच से लगातार कांग्रेस में परिवारवाद के मुद्दे को उठाते रहे। लेकिन, कांग्रेस का परिवारवाद का मुद्दा भी बीजेपी के लिए इस चुनाव में बेअसर दिखा।
बागियों ने बिगाड़ा बीजेपी का खेल
इस बार विधानसभा चुनाव में बीजेपी का खेल बिगाड़ने में बागी भी एक फैक्टर रहे। लेकिन, इन्होंने निर्दलीय चुनाव में उतरकर बीजेपी की टेंशन बढ़ी दी। बीजेपी सांसद नवीन जिंदल की मां ने पार्टी से टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर हिसार से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। इनके अलावा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री रह चुके रामबिलास शर्मा ने भी निर्दलीय चुनावा लड़ा।
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