
नई दिल्ली. हरतालिका तीज व्रत कल है.हरतालिका तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाते हैं. वहीं इस व्रत को हरतालिका तीज या फिर तीजा भी कहते है. हरतालिका व्रत साल 2020 में 21 अगस्त दिन शुक्रवार को रखा जाएगा.हरतालिका तीज को लेकर महिलाएं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा हैं. यह व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं, इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए निर्जला व्रत रखकर महादेव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा करती हैं.
आपको बता दें कि हरतालिका तीज व्रत आज सुबह 6 बजकर 18 मिनट से द्वितीया तिथि प्रारंभ होकर रात 4 बजकर 14 मिनट तक रहेगा, जिसमें महिलाएं पूरे दिन समयानुसार नहाय खाय का कार्य कर सकती हैं.वहीं, तृतीया तिथि की शुरुआत शुक्रवार की सुबह में होगी. महिलाएं शुक्रवार की सुबह से रात 1 बजकर 59 मिनट तक यानी पूरे दिन व्रत रखकर और अगले दिन शनिवार की सुबह स्नान करने के बाद पारण कर लें.
हरतालिका तीज व्रत दो तरीके से रखा जाता है जानें कैसे-
हरतालिका तीज व्रत का बहुत महत्व माना जाता हैं. यह व्रत बेहद ही कठिन व्रत होता है. दो प्रकार से किया जाता है. एक निर्जला और दूसरा फलहारी. निर्जला व्रत में पानी नहीं पीते है, इसके साथ ही अन्न या फल कुछ भी ग्रहण नहीं करते हैं, वहीं फलाहारी व्रत रखने वाले लोग व्रत के दौरान जल पी सकते हैं और फल का सेवन करते हैं, जो कन्याएं निर्जला व्रत नहीं कर सकती हैं तो उनको फलाहारी व्रत करना चाहिए. इस व्रत की मान्यता है कि इस व्रत को रखने और विधि-विधान से पूजा करने से दांपत्य जीवन सुखद होता है. इस व्रत से पति-पत्नी के बीच की अनबन दूर होती है.
जानें क्यों रखा जाता है हरतालिका व्रत-
हरतालिका तीज व्रत कल है. इसलिए आज बताते हैं कि हरतालिका व्रत क्यो रखा जाता हैं. मान्यता है कि देवी पार्वती की सहेली उन्हें उनके पिता के घर से हर कर घनघोर जंगलों में ले आई थी, इसलिए इस दिन को हरतालिका कहते हैं. यहां हरत का मतलब हरण और आलिका का मतलब सहेली या सखी है. इसीलिए इस व्रत का नाम हरतालिका व्रत कहा जाता है. उस दिन भगवान शंकर ने पार्वती जी को यह कहा कि जो कोई भी स्त्री इस दिन परम श्रद्धा से व्रत करेगी उसे तुम्हारी तरह ही अचल सुहाग का वरदान प्राप्त होगा.
हरतालिका व्रत के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियां-
इस व्रत के दौरान व्रती महिलाओं को रात में सोना नहीं चाहिए. इस दिन महिलाएं मिलकर भजन करके रात भर जागरण करती हैं.
इस दिन मांसाहार करने वाली लड़कियों को घोर श्राप मिलता है, इसलिए इस दिन मांसाहार से दूर रहें.
हरतालिका तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं को क्रोध व चिड़चिड़ाहट इस दिन नहीं करनी चाहिए. गाली ग्लोच नही करनी चाहिए. मन को शांत रखने के लिए मेंहदी लगाई जाती है.
मान्यता है कि तीज का व्रत निर्जला करना चाहिए, इस दौरान कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए.
इस दिन घर के बुजुर्गों को किसी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए और उन्हें दुखी नहीं करना चाहिए. ऐसा करने वाले लोगों को अशुभ फल मिलता है.
व्रत के दौरान किसी भी महिला को दूध का सेवन नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से अगले जन्म में सर्प योनि में जन्म मिलता है.
पूजा का मुहूर्त-
हरतालिका तीज पूजा का मुहूर्त 21 अगस्त को प्रात:काल 05 बजकर 53 मिनट 39 सेकेंड से 08 बजकर 29 मिनट 44 सेकेंड तक है.
वहीं प्रदोष काल मुहूर्त 6 बजकर 54 मिनट 04 सेकेंड से 9 बजकर 06 मिनट 06 सेकेंड तक है. इस दौरान पूजा कर सकते हैं.
हरतालिका तीज की पूजा विधि-
ऐसा करने से हर प्रकार की परेशानियों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है.
हरतालिका तीज की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोषकाल में की जाती है. सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त को प्रदोषकाल कहा जाता है. यह दिन और रात के मिलन का समय होता है.
इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू रेत और काली मिट्टी की प्रतिमा हाथों से बनाई जाती है.
पूजा स्थल को फूलों से सजाकर एक चौकी रखकर उस पर केले के पत्ते बिछाएं और भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें.
इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का षोडशोपचार पूजन करें.
पूजा की दौरान सुहाग की सभी वस्तुओं को पूजा स्थल पर रखकर सच्चे मन से भगवान की स्तुति करनी चाहिए.
हरतालिका तीज की पूजा में शिव जी को धोती और अंगोछा चढ़ाया जाता है. बाद में यह सामग्री किसी ब्राह्मण को दान देना चाहिए.
तीज की कथा सुनें और रात्रि जागरण करें. आरती के बाद सुबह माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं और हलवे का भोग लगाकर व्रत खोलें.
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