
नई दिल्ली:आज पूरे देश में गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जा रहा है। आज से महाराष्ट्र समेत पूरे देश में 10 दिनों का गणेश उत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह त्योहार भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में जाना जाता है और हिंदू धर्म में बहुत महत्व रखता है। यहां आपको गणेश चतुर्थी की पूजा विधि, मंत्र, और भोग के बारे में जानकारी दी जा रही है।
शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी के लिए पूजा का मुहूर्त दोपहर 11:03 बजे से शुरू होकर दोपहर 1:34 बजे तक रहेगा। इस समय के दौरान पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
पूजन विधि:
स्थापना
सबसे पहले भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना करें। इसके लिए एक चौकी या पीठिका पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।
पूजा सामग्री
गणेश जी के लिए नए वस्त्र, जनेऊ, गंगाजल, पंचामृत, अक्षत, चंदन, फूल, माला, दूर्वा, धूप, दीप, गंध, पान का पत्ता, सुपारी, रक्षासूत्र, कलश, नारियल, पंचमेवा, आम के पत्ते, पवित्री, कपूर, सिंदूर, गाय का घी, और मौसमी फल जैसे सेब, केला आदि रखें।
मंत्र
पूजा के दौरान "ॐ गण गणपतये नमः" या "ॐ विघ्नेश्वराय नमः" मंत्र का जाप करें। गणेश चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है।
भोग
भगवान गणेश को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। इन्हें उनका प्रिय भोग माना जाता है।
अन्य विधियां
पूजा के बाद, भोग के रूप में मोदक या लड्डू का प्रसाद बांटें।
गणेश चतुर्थी के दिन, चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा है, जो चारों दिशाओं में प्रकाश फैलाता है।
अंत में, आरती करें और प्रार्थना करें कि सभी बाधाएं दूर हों और ज्ञान, सौभाग्य, और समृद्धि का आगमन हो।
गणेश चतुर्थी का त्योहार न केवल भगवान गणेश की पूजा का अवसर है बल्कि परिवार और समुदाय के साथ एकजुटता और खुशियां बांटने का भी समय है।
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