
Haryana Vidhan Sabha Chunav: हरियाणा विधानसभा चुनावों में राजनीतिक गहमा-गहमी चरम पर है, और इस बार राजस्थान के नेताओं को चुनावी प्रचार में अहम भूमिका दी गई है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही प्रमुख पार्टियाँ राजस्थान के नेताओं को अपनी रणनीतिक टीम में शामिल कर रही हैं, जिससे चुनावी प्रचार की दिशा और धार में बदलाव देखा जा रहा है।
बीजेपी ने 40नेताओं की सूची में शामिल किए 5राजस्थान के प्रमुख चेहरे
बीजेपी ने अपने स्टार प्रचारकों की एक सूची जारी की है जिसमें 40नेताओं के नाम शामिल हैं। इस सूची में राजस्थान के पांच प्रमुख नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं:
1- सतीश पूनिया:पूर्व राजस्थान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में हरियाणा के प्रभारी।
2- भजनलाल शर्मा:2023में राजस्थान के मुख्यमंत्री बने, और हरियाणा चुनाव में बीजेपी की ओर से प्रमुख चेहरे।
3- वसुंधरा राजे:पूर्व मुख्यमंत्री, जिनकी चुनावी अनुभव को बीजेपी ने महत्व दिया।
4- अर्जुन राम मेघवाल:केंद्रीय मंत्री जो 2017से मोदी कैबिनेट में हैं और दलित समुदाय को ध्यान में रखते हुए प्रचार में शामिल हैं।
5- दीया कुमारी:2023में राजस्थान की डिप्टी सीएम बनीं, और युवा व गुर्जर समुदाय को लुभाने के लिए चुनी गईं।
हालांकि बीजेपी की लिस्ट में करीब 10हरियाणा के स्टार प्रचारक भी शामिल हैं, लेकिन राजस्थान के नेताओं की भूमिका पर चर्चा का माहौल बना हुआ है।
कांग्रेस ने भी राजस्थान के तीन प्रमुख नेताओं को प्रचार में शामिल किया
कांग्रेस ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची में 40नाम शामिल किए हैं, जिसमें राजस्थान के तीन प्रमुख नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है:
1- अशोक गहलोत:पूर्व मुख्यमंत्री और हरियाणा में कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक, जो चुनाव की निगरानी और लूपहोल्स को ठीक करने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
2- सचिन पायलट:पूर्व डिप्टी सीएम और कांग्रेस के तेज-तर्रार वक्ता, जिनके प्रभावशाली भाषण चुनाव प्रचार में मददगार साबित हो सकते हैं।
3- गोविंद सिंह डोटासरा:प्रदेश अध्यक्ष, जो जाट समुदाय को साधने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
कांग्रेस ने भी कुछ विधायकों को ग्राउंड लेवल पर काम करने की जिम्मेदारी दी है, और इन्हें एक-एक सीट जीताने का लक्ष्य सौंपा गया है।
राजस्थान के नेताओं को तरजीह देने की वजह
हरियाणा में राजस्थान के नेताओं को प्रमुखता देने के पीछे कुछ मुख्य कारण हैं:
जातीय समीकरण:हरियाणा में जाटों का राजनीतिक प्रभाव है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने जाट समुदाय को साधने के लिए अपने राजस्थान के नेताओं को प्रमुखता दी है। कांग्रेस ने गोविंद सिंह डोटासरा और बीजेपी ने सतीश पूनिया को इस संदर्भ में प्रचार में शामिल किया है।
आबादी का संतुलन:हरियाणा में ब्राह्मणों की आबादी भी महत्वपूर्ण है। बीजेपी ने भजनलाल शर्मा को इस समुदाय को लुभाने के लिए लगाया है, जबकि दलितों के लिए अर्जुन राम मेघवाल को आगे किया गया है।
नेता की संख्या और अनुभव:राजस्थान में कांग्रेस और बीजेपी दोनों के पास मजबूत और अनुभवी नेता हैं, जो हरियाणा चुनाव में प्रचार की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
चुनावी तारीखें और प्रमुख मुकाबले
हरियाणा विधानसभा के 90सीटों के लिए मतदान 5अक्टूबर को होगा और वोटों की गिनती 8अक्टूबर को की जाएगी। इस बार मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच है, जबकि जेजेपी, इनेलो और आप जैसी पार्टियाँ भी चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटी हैं।
राजनीतिक गतिविधियों और प्रचार के इस चरम समय में, यह देखना दिलचस्प होगा कि राजस्थान के नेताओं की भूमिका हरियाणा चुनाव परिणामों को कैसे प्रभावित करती है।
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