
Bank Loan Fraud Case: रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी से प्रवर्तन निदेशालय (ED) पूछताछ कर रही है। बता दें कि 17,000 करोड़ रुपये के कथित बैंक लोन फ्रॉड मामले में उन्हें आरोपी माना जा रहा है। अनिल अंबानी को दिल्ली स्थित ED मुख्यालय में तलब किया गया था, जहां उनसे मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत पूछताछ शुरू हो चुकी है।
35 ठिकानों पर हुई थी छापेमारी
ED की यह कार्रवाई पिछले महीने शुरू हुई थी, जब एजेंसी ने रिलायंस ग्रुप से जुड़े 35 ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच का केंद्रबिंदु रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और उससे जुड़ी कंपनियां हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने बैंकों से लिए गए करोड़ों रुपये के लोन को इंटर-कॉरपोरेट डिपॉजिट (ICD) के नाम पर दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किया था।
ईडी ने भेजा था इन कंपनियों को नोटिस
जानकारी के अनुसर, इन ट्रांजैक्शनों में CLE नामक एक कंपनी का इस्तेमाल किया गया था, जिसे रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने रिलेटेड पार्टी के तौर पर घोषित नहीं किया। इससे शेयरधारकों और ऑडिट कमेटी की मंजूरी भी नहीं ली गई थी। वहीं, ईडी ने इस मामले में 39 बैंकों को भी नोटिस भेजा है और पूछा गया है कि उन्होंने लोन मॉनिटरिंग में चूक क्यों की। एजेंसी का कहना है कि जब कंपनियां डिफॉल्ट करने लगीं तब भी बैंकों ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया था।
ED ने की थी पहली गिरफ्तारी
संघीय जांच एजेंसी ने पिछले सप्ताह इस मामले में पहली गिरफ्तारी की थी। बता दे कि ईडी ने बिस्वाल ट्रेड लिंक प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर पार्थसारथी बिस्वाल को 1 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उन्होंने बताया कि ये बैंक गारंटी रिलायंस पावर की ओर से दी गई थी। साथ ही अनिल अंबानी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है।
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