
नई दिल्ली: कोरोना काल में क्राइम ब्रांच और ED के लिए अभी भी निजामुद्दीन मरकज के मौलाना साद पुलिस के लिए सरदर्द बना हुआ है. मौलाना साद की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है. मौलाना साद एक के बाद एक ऑडियो जारी कर रहा है, मीडिया से लगातार इंटरव्यूह दे रहा है. इन सब के बीच EDको थोड़ी कामयाबी मिली है. मरकज के बैंक खाते का पता लगया है. मरकज का बैंक खाता पुरानी दिल्ली में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 'मदरसा काशिफ- उल- उलूम' नाम से है.अब क्राइम ब्रांच और ईडी मरकज के इस बैंक खाते को खंगाल रही हैं. बताया जाता है कि 20 जून साल 2016 को मरकज के अंदर कुछ लोगों को बांधकर बुरी तरह से पीटने और धमकी देने की शिकायत भी दर्ज हुई थी.
निजामुद्दीन थाने में मरकज की जमात में आए कुछ लोगों ने मरकज के प्रबंधन से जुड़े लोगों पर मरकज के अंदर बंद करके मारपीट करने का धमकी देने का आरोप लगाया था और एफआईआर दर्ज कराई थी. सूत्र बताते हैं कि मौलाना साद ने अपने रसूख के दम पर तब पीड़ितों के खिलाफ क्रॉस एफआईआर दर्ज करवा दी थी. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी. हालांकि, बाद में मामला कोर्ट में सेटल हो गया था. बैंक खाते की जानकारी हाथ लगने से यह साफ हो गया है कि मरकज अब भी मदरसे के नाम से चलती है. मरकज में सत्ता को लेकर भी साद और उसके विरोधियों के बीच कई बार संघर्ष हो चुका है. इसकी वजह मरकज में आने वाला पैसा बताया जाता है. मरकज की 5 मंजिला बिल्डिंग को आलीशान तरीके से बनवाया गया है और इसी में मौलाना का परिवार और बेटे रहते हैं.
बता दें कि लॉकडाउन के बीच जब धारा 144 लागू थी, निजामुद्दीन के मरकज से 2,000 से अधिक जमातियों को निकाला गया था. जमातियों के कारण कई राज्यों तक कोरोना पहुंचा. इस मामले में साद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर इसकी जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी. लेकिन, इस मामले में पुलिस के हाथ अभी भी खाली है. पुलिस के साथ पूरे देश को मौलाना के गिरफ्तारी का इंतजार है. जिससे पूरे मामले का सच देश के सामने आ सके.
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