‘मैं राहुल गांधी से कहूंगी कि...’ विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोपों पर उमा भारती ने दिया बड़ा बयान

‘मैं राहुल गांधी से कहूंगी कि...’ विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोपों पर उमा भारती ने दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली: 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले मेंNIA कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को बरी करने पर भाजपा नेता उमा भारती ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जिन कुछ चीजों की जांच होनी चाहिए, उनमें सबसे पहले व्यापम घोटाले में मेरा नाम है। 2008 के मालेगांव विस्फोट में लोगों की जान चली गई। उनके (लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा सिंह) नाम इसमें क्यों जोड़े गए, और असली दोषियों को अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?। यह पूरा का पूरा जांच का विषय है और असली दोषियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

न्यूज एजेंसी एएनआईसे बात करते हुए उमा भारती ने कहा कि यह हिंदुओं को बदनाम करने और तुष्टिकरण की राजनीति करने की बहुत बड़ी साजिश थी। इस साजिश में शामिल लोगों को देश की प्रतिष्ठा की परवाह नहीं थी। उन्हें केवल सत्ता की परवाह थी। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा सिंह और अन्य को निशाना बनाया गया। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को बहुत प्रताड़ित किया गया। साध्वी प्रज्ञा सिंह को इतनी बेरहमी से प्रताड़ित किया गया कि अब वह चलने में भी असमर्थ हैं। उन्हें 100 थप्पड़ मारे गए।

विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोपों पर, भाजपा नेता उमा भारती ने ANI को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "राहुल गांधी भूल जाते हैं कि चुनाव आयोग से चुनाव नहीं जीता जाता है बल्कि लोगों का दिल जीतकर जीता जाता है। मैं राहुल गांधी से कहूंगी कि पहले लोगों का हृदय जीतना सीखें। आप सशस्त्र बलों का अपमान करते हैं, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करने की बात करते हैं, निमंत्रण के बावजूद, आप राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में भी शामिल नहीं हुए। आप राष्ट्रीय गौरव की सभी बातों की अवहेलना करते हैं, और आपकी पार्टी चुनाव नहीं जीत पा रही है, आपकी पार्टी का सफाया होता जा रहा है। बोलने से पहले सोचें या याददाश्त सुधारने के लिए होम्योपैथिक दवा लें।

आपातकाल लगाने के बाद भी इंदिरा गांधी चुनाव हार गईं- उमा भारती

उमा भारती ने कहा कि उन्होंने आगे कहा, "आपातकाल लगाने के बाद भी इंदिरा गांधी चुनाव हार गईं, क्योंकि जब मतदाता तय कर लेता है कि किसे चुनना है, तो कोई भी उनके जनादेश को नहीं चुरा सकता। लोकतंत्र में मतदाताओं के पास सारी शक्ति होती है।

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