Delhi Traffic New Rule: दिल्ली की जिला अदालतों में सोमवार, 21 सितंबर को वकीलों ने एक दिन के लिए न्यायिक कामकाज का बहिष्कार किया। यह विरोध केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के संशोधित नियम 167 के खिलाफ किया गया। वकीलों का कहना है कि नए नियमों से ट्रैफिक चालान को चुनौती देने और उसका फैसला कराने की मौजूदा प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हो सकता है। वकीलों ने अब अपना विरोध और तेज करने का फैसला किया है। बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति के मुताबिक, 24 सितंबर को तीस हजारी कोर्ट से उपराज्यपाल (LG) कार्यालय तक मार्च निकाला जाएगा। वकील संशोधित चालान व्यवस्था को वापस लेने की मांग करेंगे। बार कमेटी के महासचिव नरवीर डबास ने कहा कि वकील नए चालान निपटारा सिस्टम को लेकर अपनी चिंताएं LG के सामने रखेंगे।
चालान पर 45 दिन में करना होगा फैसला
संशोधित नियम 167 के तहत चालान मिलने के बाद वाहन मालिक या चालक को 45 दिनों के भीतर चालान की रकम जमा करनी होगी या निर्धारित पोर्टल के माध्यम से उसे चुनौती देनी होगी। चुनौती देते समय संबंधित दस्तावेज भी जमा करने होंगे। अगर तय 45 दिनों में चालान को चुनौती नहीं दी जाती है, तो नियम के तहत इसे स्वीकार किया हुआ माना जाएगा।
कोर्ट जाने से पहले 50 फीसदी रकम जमा करने की शर्त
वकीलों की सबसे बड़ी आपत्ति उस स्थिति को लेकर है, जब प्रशासनिक स्तर पर चालान के खिलाफ की गई चुनौती खारिज हो जाती है। संशोधित व्यवस्था के मुताबिक, इसके बाद अदालत का रुख करने से पहले चालान की 50 फीसदी रकम जमा करनी होगी। वकीलों का कहना है कि यह शर्त उन लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है, जिनके पास चालान की बड़ी रकम का आधा हिस्सा पहले जमा करने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। उनका तर्क है कि इससे न्यायिक उपाय तक पहुंच मुश्किल हो सकती है।
मजिस्ट्रेट की जगह अधिकारियों को अधिकार देने पर सवाल
वकीलों ने चालान विवादों की शुरुआती सुनवाई का अधिकार न्यायिक मजिस्ट्रेट के बजाय SDM, कार्यकारी मजिस्ट्रेट और अलग-अलग सरकारी विभागों के अधिकारियों को दिए जाने पर भी आपत्ति जताई है। बार कमेटी ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों, तहसीलदारों और जिला परिवहन एवं प्रवर्तन कार्यालयों के अधिकारियों को चालान संबंधी शिकायतों के निपटारे के लिए नामित किए जाने पर सवाल उठाया है। वकीलों का कहना है कि चालान पर विवाद का फैसला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका संबंध नागरिक के न्यायिक अधिकार से भी है।
दिल्ली सरकार को पहले भी दिए गए थे ज्ञापन
नई दिल्ली बार एसोसिएशन के सचिव अधिवक्ता तरुण राणा के मुताबिक, बार कमेटी ने 27 अगस्त और 7 सितंबर को दिल्ली सरकार को अपनी आपत्तियों से अवगत कराया था। उनके अनुसार, बैठकों के दौरान वकीलों को बताया गया था कि SDM और विभागीय अधिकारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव केंद्र के साथ चर्चा होने तक लागू नहीं किया जाएगा। बाद में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को चालान निपटारे के लिए नामित किए जाने की खबर सामने आने के बाद वकीलों ने विरोध तेज करने का फैसला किया।
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