
नई दिल्ली: दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाने वाले ‘दिल्ली स्कूल शिक्षा ‘फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता विधेयक 2025’ के पारित होने के बाद, आज राजधानी के अलग-अलग इलाकों से आए सैकड़ों अभिभावक और संरक्षक मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मुलाकात करने दिल्ली विधानसभा पहुंचे। इस अवसर पर अभिभावकों ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह फैसला दिल्ली के मध्यमवर्गीय और आम परिवारों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी अभिभावकों का स्वागत करते हुए कहा कि यह बिल केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि दिल्ली के हर बच्चे के भविष्य की सुरक्षा का वचन है। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि शिक्षा व्यापार नहीं, बल्कि हर बच्चे का अधिकार है। इस अधिकार की रक्षा करना और शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अभिभावकों ने भावुक होते हुए साझा किया कि अब तक निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी ने कई परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भारी बोझ डाल दिया था। लेकिन पहली बार हमारी आवाज़ को सच में सुना गया है और उसे कानून का रूप दिया गया है। अब हमें भरोसा है कि बच्चों की पढ़ाई पैसों की कमी की वजह से बाधित नहीं होगी।
इस कानून को सख्ती से लागू किया जाएगा
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस कानून को सख्ती से लागू किया जाएगा और किसी भी प्रकार की मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा में जनसहभागिता बढ़ाने के लिए अभिभावकों को फीस निर्धारण प्रक्रिया में सीधे शामिल किया जाएगा, ताकि स्कूल और अभिभावकों के बीच विश्वास और संवाद का पुल मजबूत हो।
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