
Delhi News: दक्षिणी दिल्ली स्थित अनधिकृत श्रम विहार कॉलोनी में रहने वालों लोगों को हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। इस अदालत ने कहा कि सितंबर 2024 में यमुना नदी में प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा था। जिसका मुख्य कारण इन कॉलोनियों मनें यमुना में प्रवाहित होने वाला अनुपचारित सीवेज है।
मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। उन्होंने कहा कि यह न्यायालय भी स्वयं इस तथ्य पर न्यायिक संज्ञान ले रहा है कि यमुना में प्रदूषण अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर है। यमुना को प्रदूषित करने का यह एक बड़ा कारक है। ऐसे अतिक्रमण हटाने पर रोक लगाने के याचिकाकर्ता हकदार नहीं हैं।
सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने कहा कि इस कॉलोनी की बात की जा रही है। वह दिल्ली के मास्टर प्लान 2012 के तहत जोन ‘ओ’ में आती है। यह की भूमि का उपयोग बागवानी के लिए किया जाता है। इन जगहों पर वनस्पतियों और जीवों की भरमार होती है। यह ध्यान में रखना चाहिए कि जोन ‘ओ’ की परिकल्पना यमुना के कायाकल्प, नदी व उसकी आकृति विज्ञान के अनुरूप पर्यावरण के अनुकूल विकास के लिए की गई है। ऐसे में इस कॉलोनी को ध्वस्त करने के नोटिस पर विचार करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
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