Corona Infection Test Update: रैपिड टेस्ट किट की क्वालिटी पर सवाल, ICMR ने लगाई इस्तेमाल पर इतने दिनों की रोक, आखिर क्यों जानें?

Corona Infection Test Update:  रैपिड टेस्ट किट की क्वालिटी पर सवाल, ICMR ने लगाई इस्तेमाल पर इतने दिनों की रोक, आखिर क्यों जानें?

नई दिल्ली: देश में कोरोना की जांच में तेजी आई है. कई अस्पतालों में पहले से ही अधिक कोरोना टेस्ट किए जा रहे हैं. इसकी वजह से देश में कोरोना को आंकड़ों में भी उछाल देखा गया है. हाल ही में चीन से टेस्ट किट भारत में आईं जिनसे कोरोना टेस्ट किए जा रहे थे लेकिन इन किटों की क्वालिटी भी खराब होने की बात सामने आई थी. बहरहाल सरकार ने कोरोना की जांच के लिए रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट की नई किट के इस्तेमाल पर दो दिन की रोक लगाई है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने मंगलवार को राज्यों से कहा है कि टेस्ट किट में खराबी की शिकायतों की हम जांच करेंगे. दो दिन तक सभी राज्य इसके इस्तेमाल को रोक दें.
 
बता दें कि भारत ने पिछले हफ्ते ही चीन से करीब 5 लाख नई किट खरीदी थीं. इस किट की एक्यूरेसी 90 फीसदी होनी चाहिए, लेकिन राजस्थान सरकार का कहना था कि नई किट से एक्यूरेसी सिर्फ 5.4 फीसदी ही है. यहां यह जानने की बात है कि आखिर ये रैपिड टेस्ट किट क्या है. तो बता दें कि इस टेस्ट के जरिए कोरोना के संदिग्ध मरीजों के खून के नमूनों की जांच की जाती है. ये कोरोना के संदिग्ध मामलों की तेजी से स्क्रीनिंग और उनका पता लगाने के लिए जरूरी है. मरीज के स्वाब की पैथोलॉजी लैब में होने वाली टेस्ट से मिलने वाले नतीजों की तुलना में रैपिड टेस्ट किट से नतीजे हासिल करने में कम समय लगता है. जांच में तेजी लाने के लिए सरकार ने हाल ही में 5 लाख रैपिड टेस्ट किट खरीदी हैं जिनमें शिकायत की बात आई थी.
 
आईसीएमआर के तर्क
 
हाल ही में आईसीएमआर ने कहा था कि कोरोना के हॉटस्पॉट वाले इलाके में हर व्यक्ति की जांच के लिए ये किट मुहैया कराई जाएं. जिसके बाद देश के कई राज्यों में इनकी सप्लाई की गई थी. राजस्थान ने इस किट को कोरोना जांच में फेल पाया और इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी. इस किट से 1232 लोगों के टेस्ट किए गए थे. सिर्फ दो लोगों के पॉजिटिव होने के संकेत मिले. राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि रैपिड टेस्टिंग किट का असर जानने के लिए हमने एक कमेटी बनाई थी. इन किट्स की एक्यूरेसी 90 फीसदी होनी चाहिए थी, लेकिन यह महज 5.4 फीसदी ही आ रही है. टेस्टिंग के वक्त तापमान को लेकर जो गाइडलाइन थी, उसका भी पालन किया गया था, इसके बावजूद नतीजे सटीक नहीं हैं. विशेषज्ञों की टीम ने सलाह दी है कि इस किट के इस्तेमाल से कोई फायदा नहीं है. ऐसे में रैपिड टेस्टिंग किट से जांच रोक दी गई है. 
 
सवाल उठने के बाद आईसीएमआर के एक विशेषज्ञ का कहना है कि हमें एक राज्य से इस किट के जरिए कम डिटेक्शन होने की शिकायत मिली थी. लिहाजा, हमने तीन और राज्यों से बात की और पाया कि इसकी एक्यूरेसी में काफी फर्क है. कुछ जगहों पर इसकी एक्यूरेसी 6 फीसदी और कुछ पर 71 फीसदी है. यह अच्छी बात नहीं है क्योंकि जब इतना फर्क होता है तो हमें जांच करनी होगी. 
 

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