
MUDA Land Scam: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को हाई कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। दरअसल, MUDA लैंड स्कैम में गवर्नरथावरचंद गहलोत के द्वारा दिए गए जांच के आदेश के खिलाफ दायर किए गए अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अर्जी पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि तथ्यों की जांच करना जरुरी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद सीएम सिद्धरमैया की मुश्किलें बढ़ने वाली है।
इस मामले को लेकर भाजपा लंबे समय से सीएम पर हमलावर है। बीजेपी ने सिद्धरमैया से इस्तीफे की मांग की थी। हालांकि, सिद्धरमैया ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया था। लेकिन अब जब कोर्ट ने जांच चलाने के आदेश को रोकने से मना कर दिया है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि अब आगे सीएम क्या करते हैं?
हाई कोर्ट पहुंचे थे सीएम
इस मामले को सबसे पहले समाजिक संस्थाओं ने उठाया। सामाजित कार्यकर्ता टीजे अब्राहम की याचिका के बाद गवर्नर ने सीएम से स्पष्टीकरण मांगा। 3 अगस्त 2024 को सीएम ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को झूठा करारा दिया। इस दौरान भाजपा और जेडीएस ने सीएम के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। भाजपा और जेडीएस ने सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ मैसूर पैदल मार्च निकाला। वहीं, 17 अगस्त को राज्यपाल ने सीएम के खिलाफ मामला चलाने की अनुमति दे दी। इसी के खिलाफ सिद्धारमैया हाई कोर्ट पहुंचे थे। जहां उन्हें राहत नहीं मिली। माना जा रहा है कि सिद्धारमैया होई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
क्या है MUDA स्कैम?
MUDA यानी मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण, मैसूर शहर की एक स्वायत्त संस्था है। इस संस्था की जिम्मेदारी जमीनों के अधिग्रहण और आवंटन का काम करती है। भाजपा के लगाए जा रहे आरोप के अनुसार, सिद्धारमैया इसी संस्था के सहारे घोटाला किया है। दरअसल, मामला 3.14 एकड़ की है, जो सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती के नाम पर है। MUDA इस 3.16 एकड़ भूमि के बदले 50:50 अनुपात योजना के तहत सीएम का पत्नी को भूखंड आवंटित किए थे। जहां बाद में जाकर MUDA ने एक आवासीय लेआउट विकसित किया था। गौरतलब है कि ये मामला काफी पुराना है। साल 2004 से ही चल रहा है। साल 2024 में विपक्ष के द्वारा विधानसभा में MUDA स्कैम पर चर्चा की मांग की गई लेकिन विधानसभा अध्यक्ष यूटी खादर ने इनकार कर दिया।
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