
Char Dham Yatra: उत्तराखंड में होने वाली प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने बड़ा फैसला लिया है। समिति ने आगामी चारधाम यात्रा के लिए 121.07 करोड़ रुपये से अधिक का बजट मंजूर किया है। इसके साथ ही समिति ने अपने अधीन आने वाले 45 मंदिरों में गैर-सनातनियों (गैर-हिंदुओं) के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव भी पारित किया है। यह फैसला समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया।
यात्रियों की सुविधा का रखा गया ध्यान
मंजूर हुए बजट के अनुसार, बद्रीनाथ धाम के लिए 57.47 करोड़ रुपये और श्री केदारनाथ धाम के लिए 63.60 करोड़ खर्च किए जाएंगे। बजट में कुल अनुमानित खर्च करीब 99.45 करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि बाकी राशि अन्य व्यवस्थाओं और विकास कार्यों में इस्तेमाल की जाएगी। हेमंत द्विवेदी ने बताया कि चारधाम यात्रा अप्रैल महीने से शुरू होगी। उन्होंने कहा कि आने वाले तीर्थ सीजन को ध्यान में रखते हुए ही यह बजट तैयार किया गया है, ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
मंदिरों में पुनर्निर्माण का कार्य
उन्होंने ये भी बताया कि मंदिरों में पुनर्निर्माण और विकास कार्य लगातार चल रहे हैं। केदारनाथ धाम में पुनर्वास कार्य पूरा हो चुका है, जबकि बद्रीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य जारी है। यह काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। बैठक में यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई अन्य फैसले भी लिए गए। इनमें ऋषिकेश के ट्रांजिट कैंप में मंदिर समिति का कैंप ऑफिस खोलना, यात्रा से पहले की व्यवस्थाओं को मजबूत करना और मंदिर क्षेत्र के आसपास मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर कुछ दूरी तक प्रतिबंध लगाने जैसे कदम शामिल हैं।
कई प्रस्तावों को मिली मंजूरी
इसके अलावा भीड़ प्रबंधन, बिजली-पानी की व्यवस्था, साफ-सफाई और यात्रियों के ठहरने की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है। समिति ने कर्मचारियों के प्रमोशन, अस्थायी कर्मचारियों के वेतन अंतर को ठीक करने, धार्मिक सामग्री की खरीद, मंदिर परिसर के नवीनीकरण और ऑनलाइन सेवाओं को बेहतर बनाने जैसे प्रस्ताव भी मंजूर किए।
गैर-सनातनियों के प्रवेश पर लगी रोक
हालांकि, गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक के फैसले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे BJP सरकार का ध्यान भटकाने वाला कदम बताया है। कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि गैर-हिंदू वैसे भी इन मंदिरों में प्रवेश नहीं करते, इसलिए इस तरह के औपचारिक प्रतिबंध की जरूरत नहीं है। फिर भी समिति का कहना है कि यह फैसला देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं और मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
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