
सिनेमा जगत को केंद्रिय कैबिनेट की तरफ से बड़ी राहत मिली है । केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सिनेमैटोग्राफ बिल को मंजूरी दे दी है। इसके अंतर्गत अब फिल्म सर्टिफिकेशन बोर्ड के पास मौका होगा कि वो फिल्मों को तीन से ज्यादा कैटेगरीज में बांट सके। इस बिल के आ जाने से फिल्म पाइरेसी पर भी लगाम लगेगी। इस बिल की मांग फिल्म मेकिंग से जुड़े लोग कई सालों से कर रहे थे।बता दें, बिना अनुमति के फिल्म की कॉपी बनाने वाले किसी भी व्यक्ति को तीन महीने से तीन साल तक की जेल हो सकती है, इसके अलावा उसके ऊपर 3 लाख का जुर्माना भी लग सकता है।
केंद्रीय कैबिनेट ने इस बिल को मंजूदी दे दी है। इस बिल को अब संसद में पेश किया जाएगा। संसद से बिल को मंजूरी मिलने के बाद ये कानून का रूप ले लेगा। इस बिल में कुछ नई कैटेगरीज से फिल्म को सर्टिफाई करने जैसे UA 7+, UA 13+ और UA 16+ को शामिल किया गया है।
कितने तरीके से होता है सर्टिफिकेशन
फिलहाल फिल्मों को तीन तरह से सर्टिफाई किया जाता है। पहला है U जिसे यूनिवर्सल कहा जाता है। अगर किसी फिल्म को U सर्टिफिकेट मिलता है, तो इसका मतलब उसे किसी भी एज ग्रुप का व्यक्ति बिना किसी रिस्ट्रिक्शन के देख सकता है। दूसरा आता है UA जिसका मतलब ये है कि अगर कोई बच्चा 18 साल के कम है तो वो माता पिता के मार्गदर्शन में UA सर्टिफाइड फिल्म देख सकता है। तीसरे पर आता है A सर्टिफाइड वाली फिल्में। इन फिल्मों को सिर्फ वही लोग देख सकते हैं, जिनकी उम्र 18 साल से ज्यादा हो चुकी है।
अब तक इतना हो चुका नुकसान
डिजिटल टीवी रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार ओटीटी प्लेटफॉर्म को 2022में पाइरेसी से करीब 24.63हजार करोड़ (3.08बिलियन डॉलर) का नुकसान हुआ था । इन प्लेटफॉर्म पर करीब 6.2करोड़ (62मिलियन) यूजर्स हैं, जो पायरेटेड फिल्में देखते हैं, जिससे सीधे तौर पर ओरिजिनल फिल्मों को नुकसान होता है।
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