Bloody Struggle In Galwan: घायल जवान की आंखों देखी - किस तरह 5 घंटे तक चला चीनी सैनिकों के साथ खूनी संघर्ष

Bloody Struggle In Galwan: घायल जवान की आंखों देखी - किस तरह 5 घंटे तक चला चीनी सैनिकों के साथ खूनी संघर्ष

नई दिल्ली: लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए खूनी संघर्ष में जवान सुरेन्द्र सिंह घायल हो गए थे. अब जवान सुरेन्द्र सिंह को होश आ गया है. जवान का इलाज लद्दाख के सैनिक अस्पताल में चल रहा है. होश में आने के बाद घायल जवान ने पूरा घटनाक्रम बताया है. बता दें कि पहली बार चीन की इस खूनी हिमाकत को किसी ने बताया है.

घायल जवान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि चीनी सैनिकों ने धोखे से गलवान घाटी से निकलने वाली नदी पर अचानक भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया. करीब 4 से 5 घंटे तक नदी में ही सैनिकों के बीच खूनी संघर्ष चलता रहा. उस वक्त भारत के करीब 2 से ढाई सौ जवान मौजूद थे. जबकि चीन के 1000 से अधिक जवान थे. संख्या में कम होने के बाद भी हमने चीनी सैनिकों का डटकर हमला किया.

गलवान घाटी की नदी में हाड़-मांस को गला देने वाले ठंडे पानी में यह संघर्ष चलता रहा. उनका कहना था कि जहां यह संघर्ष हुआ उस नदी के किनारे मात्र एक आदमी के लिए निकलने की जगह थी. इसलिए भारतीय सैनिकों को संभलने में भारी परेशानी हुई नहीं तो भारतीय सैनिक किसी से कम नहीं थे. भारतीय सैनिक भी चीन के सैनिकों को अच्छा सबक सिखा सकते थे लेकिन हम पर उन्होंने साजिश के तहत और धोखे से हमला किया.

लद्दाख के सैनिक हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा है. उनके एक हाथ में फैक्चर है और सिर में करीब एक दर्जन टांके लगे हैं. उन्होंने उस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 5 फुट गहरे पानी में करीब 5 घंटे चले संघर्ष में सिर में चोट लगने से वह घायल हो गए थे और अन्य सैनिकों ने उन्हें बाहर निकाला. उन्हें तब तक होश था इसके बाद उन्हें लद्दाख के हॉस्पिटल में ही आकर करीब 12 घंटे बाद होश आया. साथ ही उनका कहना है कि इस झगड़े में उनका मोबाइल और अन्य कागजात भी नदी के पानी में कहीं गिर गए.

बता दें कि घायल जवान सुरेन्द्र सिंह राजस्थान के अलवर जिले का रहने वाला है. घायल जवान ने फोन पर परिवार वालों से बातचीत की. परिजनों ने भी घायल जवानों की जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की. वहीं. चीन की इस हिमाकत के बाद भारत सरकार ने भी चीन को सबक सिखाने का मन बना लिया है. जिसको लेकर देश की सीमाओं पर सैनिकों की तैनाती बढ़ाई जा रही है. पीएम मोदी अपने संबोधन में कह चुके है कि सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा. भारत अपनी एकता अखंडता के लिए कुछ भी कर सकता है. हम शांति के साथ-साथ जवाब देना भी जानते है.

 

 

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