
Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti 2025: 'तुम मुझे खून दो और मैं तुम्हें आजादी दूंगा'- इस मशहूर नारे को देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता और क्रांतिकारी थे। नेताजी को उनके साहस, दृढ़ संकल्प और अद्वितीय रणनीतियों के लिए जाना जाता है। सुभाष चंद्र बोस का योगदान केवल उनके द्वारा लड़ी गई लड़ाइयों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने भारतीयों के आत्मसम्मान, साहस और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया।
उन्होंने पहली बार अंडमान में स्वतंत्र भारत का झंडा लहराकर भारत के एक हिस्से को आजाद घोषित किया। बता दें, पहले 23जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाई जाती थी। लेकिन साल 2021से इस दिन को पराक्रम दिवस के रूप में जाना जाता है। पराक्रम दिवस का उद्देश्य भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को सम्मानित करना और देशभक्ति की भावना को जागृत करना है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म
सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23जनवरी 1897को ओडिशा के कटक में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस था, जो एक प्रसिद्ध वकील थे। नेताजी ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसी के साथ उन्होंने 1920में प्रतिष्ठित भारतीय सिविल सेवा (ICS) परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया।
नेताजी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता थे। जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ आज़ादी के लिए संघर्ष किया। सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर पराक्रम दिवस मनाने की शुरुआत हुई।
आजाद हिंद फौज की स्थापना
नेताजी सुभाष चंद्र बोस 1938और 1939में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। लेकिन उनके क्रांतिकारी विचारों के कारण उन्होंने खुद की अलग राह चुनी। इसके बाद साल 1943में सुभाष चंद्र बोस ने जापान की मदद से 'आजाद हिंद फौज' की स्थापना की। इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष करना था। इसके तहत 'दिल्ली चलो' का नारा दिया गया। जिसने लाखों भारतीयों को प्रेरित किया।
इसके अलावा नेताजी ने 'जय हिंद' व 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा' जैसे प्रेरणादायक नारे भी दिए। उनकी योजनाओं और वीरता ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।
पराक्रम दिवस की शुरुआत
साल 2021में भारत सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के अवसर पर पराक्रम दिवस मनाने की घोषणा की। इसका उद्देश्य नेताजी के जीवन और उनकी शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाना है। यह दिन हर भारतीय को अपने कर्तव्यों और देश के प्रति समर्पण की याद दिलाता है। इस दिन सरकार और विभिन्न संस्थान सेमिनार, प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और रैलियों का आयोजन करते हैं।
इसके अलावा 2018में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंडमान निकोबार के एक द्वीप का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रखा, जिसे नेताजी ने आजाद कराया था। देशवासियों को सुभाष चंद्र बोस के अतुलनीय संघर्ष को सदा के लिए याद दिलाने के लिए उनके कुछ गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक कर दिया। इसी के साथ इंडिया गेट और राष्ट्रपति भवन के पास कर्तव्यपथ पर उनका स्टैच्यू स्थापित कराया।
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