अयोध्या में कृषि भूमि से जुड़ा करीब पांच दशक पुराना संपत्ति विवाद आखिरकार सौहार्दपूर्ण तरीके से खत्म हो गया। इस मामले में तकनीक ने अहम भूमिका निभाई। विवाद में शामिल एक पक्ष के व्यक्ति के दुबई में होने के बावजूद समझौता पूरा हो गया। उन्होंने दुबई से समझौते के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए और उसकी स्कैन कॉपी WhatsApp के जरिए भारत में अपने वकीलों को भेज दी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए विवाद का समाधान कर दिया गया।
1972 के समझौते से जुड़ा था विवाद
यह नागरिक विवाद साल 1972 में हुए एक समझौते से जुड़ा था। अयोध्या में कृषि भूमि को लेकर दोनों पक्षों के बीच अलग-अलग दावे थे। लंबे समय से चल रहे इस विवाद को खत्म करने के लिए समझौते की प्रक्रिया शुरू की गई। दोनों पक्षों ने अयोध्या स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में विवादित जमीन के बंटवारे को लेकर बातचीत की।
दुबई में बैठे पक्ष ने ऐसे दी सहमति
समझौते के दौरान प्रतिवादी मोहम्मद तौसीफ दुबई में होने के कारण व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सके। हालांकि, उनकी गैरमौजूदगी समझौते में रुकावट नहीं बनी। तौसीफ ने दुबई में हिंदी में तैयार किए गए समझौते के दस्तावेज को प्रिंट कराया और उस पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद दस्तावेज को स्कैन करके WhatsApp के जरिए भारत में अपने कानूनी प्रतिनिधियों को भेज दिया गया। इस डिजिटल प्रक्रिया से दोनों पक्ष समझौते को अंतिम रूप दे सके।
जमीन का 53 और 47 प्रतिशत बंटवारा
अंतिम समझौते के तहत शिव कुमार की ओर से प्रतिनिधित्व किए जा रहे अपीलकर्ताओं को विवादित संपत्ति का 53 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। यह हिस्सा जमीन के उत्तरी भाग में है। वहीं, मोहम्मद रफीक और मोहम्मद तौसीफ की ओर से प्रतिनिधित्व किए जा रहे प्रतिवादियों को दक्षिणी हिस्से की 47 प्रतिशत जमीन मिलेगी। दोनों पक्षों के बीच एक और सहमति बनी है। जमीन के पश्चिमी हिस्से में मौजूद छोटे रास्ते का इस्तेमाल दोनों पक्ष आपसी सहमति से आने-जाने के लिए कर सकेंगे।
तीन दिन की विशेष लोक अदालत में हजारों मामले
यह मामला 21 से 23 अगस्त तक चली तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत के दौरान सुलझाया गया। इस दौरान कुल 3,285 मामले सूचीबद्ध किए गए। इनमें से 1,664 मामलों का निपटारा हुआ। इसके अलावा 48 मामलों का समाधान मध्यस्थता के जरिए किया गया। इस तरह कुल 1,712 मामलों का निपटारा हुआ।
तकनीक से आसान हुआ न्याय का रास्ता
अयोध्या का यह मामला दिखाता है कि आज तकनीक की मदद से दूर बैठे पक्ष भी कानूनी समझौते में आसानी से शामिल हो सकते हैं। हजारों किलोमीटर की दूरी के बावजूद डिजिटल माध्यम से दस्तावेज भेजकर इस पुराने विवाद को खत्म किया गया। यह वैकल्पिक विवाद समाधान और लोक अदालतों के जरिए कम समय में आपसी सहमति से न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
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