Jyeshtha Purnima: ज्येष्ठ पूर्णिमा हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तिथियों में से एक मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और चंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने तथा दान-पुण्य करने से सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा कई शुभ संयोगों के साथ आ रही है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है।
दान और पूजा सबसे शुभ
इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 29 जून को सुबह 4:02 बजे शुरू होकर 30 जून की सुबह 5:53 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार 29 जून को ही स्नान, दान और पूजा करना सबसे शुभ माना गया है। इस बार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और मूल नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है। साथ ही सोमवार होने के कारण भगवान शिव की पूजा का विशेष फल मिलने की मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए शुभ कार्यों का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर करें स्नान
ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। यदि संभव हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर व्रत और पूजा का संकल्प लें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को चंदन, अक्षत, तुलसी के पत्ते और मिठाई अर्पित करें। भगवान शिव का जलाभिषेक करें और उनकी पूजा करें।
अर्घ्य देना भी शुभ
शाम के समय चंद्रमा के दर्शन के बाद दूध या जल से अर्घ्य देना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे मन को शांति मिलती है और तनाव दूर होता है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार जल से भरा घड़ा, छाता, पंखा, सत्तू, गुड़, फल, अनाज, कपड़े, शक्कर और दक्षिणा का दान किया जा सकता है। जरूरतमंद लोगों की मदद करना भी बहुत पुण्यदायी माना गया है।
इन से करें परहेज
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर झूठ बोलने, किसी का अपमान करने, विवाद करने और तामसिक भोजन या नशे से दूर रहना चाहिए। साथ ही किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा, पूजा और दान के साथ मनाई गई ज्येष्ठ पूर्णिमा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आती है।
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