
Arvind Kejriwal Gets Bail: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है, लेकिन इस जमानत के साथ कुछ नई शर्तें भी लागू की गई हैं। 156दिन की कैद के बाद, उन्हें अब दिल्ली सचिवालय जाने और किसी भी महत्वपूर्ण सरकारी निर्णय पर हस्ताक्षर करने की अनुमति नहीं है। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए दिल्ली बीजेपी के नेता केजरीवाल पर 'जमानत वाला सीएम' का तंज कस रहे हैं और राष्ट्रपति शासन की मांग कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और राष्ट्रपति शासन की संभावनाएं
सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को जमानत दी है, लेकिन उनके मुख्यमंत्री पद पर कई बंदिशें लागू की हैं। बीजेपी के नेताओं ने राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग शुरू कर दी है, जिससे राजनीतिक माहौल में गर्मी आ गई है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति शासन की स्थिति में दिल्ली के प्रशासनिक मामलों में सुधार हो सकता है।
पूर्व नेताओं के उदाहरण और कानूनी सलाह
कानूनी विशेषज्ञ कुछ पूर्व घटनाओं का हवाला देते हुए सलाह दे रहे हैं कि केजरीवाल को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। वे विशेष रूप से जे. जयललिता, लालकृष्ण आडवाणी और हेमंत सोरेन के उदाहरण देते हैं, जिन्होंने अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक कामकाज को सुचारू रूप से चलाया और बाद में जमानत मिलने पर दोबारा पद संभाला।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील आर. के. सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री के बिना दिल्ली के कई महत्वपूर्ण काम प्रभावित हो सकते हैं। मुख्यमंत्री का पद किसी और को सौंपा जाना चाहिए ताकि दिल्ली को एक प्रभावी प्रशासन मिल सके। जयललिता और हेमंत सोरेन ने भी इसी तरह के हालात में अपनी जिम्मेदारियों को दूसरों को सौंपा और बाद में दोबारा पद संभाला।”
सीबीआई की आपत्तियां और कोर्ट के आदेश
सीबीआई ने केजरीवाल की जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि वे मुख्यमंत्री रहते हुए सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर सकते हैं। इसके चलते कोर्ट ने जमानत पर सख्त शर्तें लागू की हैं। अब, केजरीवाल किसी सरकारी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते और अपने सहयोगी मनीष सिसोदिया को मंत्री बनाने की सिफारिश भी नहीं कर सकते। इसके अतिरिक्त, वे विदेश यात्रा पर भी नहीं जा सकते हैं।
हरियाणा में चुनाव प्रचार की अनुमति
इस सबके बावजूद, केजरीवाल को हरियाणा में चुनाव प्रचार करने की अनुमति दी गई है। उनकी पार्टी वहां सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है, और केजरीवाल अपने प्रचार अभियान को पूरी ताकत से संचालित करेंगे। इस दौरान, दिल्ली में राष्ट्रपति शासन की संभावनाओं और बीजेपी की मांगों पर चर्चा जारी रहेगी।
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