स्कूल में नहीं मिला किताबें छूनें का हक, फिर भी बाबासाहेब ने बनाई खुद की अनोखी लाईब्रेरी

स्कूल में नहीं मिला किताबें छूनें का हक, फिर भी बाबासाहेब ने बनाई खुद की अनोखी लाईब्रेरी

Ambedkar Jayanti 2025: आज भारतीय संविधान के निर्माता और समाज सुधारक डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती है। उन्हें बाबासाहेब अंबेडकर के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन न सिर्फ बाबासाहेब के जीवन और संघर्षों की याद दिलाता है। बल्कि न्याय, सामाजिक समानता जैसे अधिकारों के लिए लड़ने की ताकत भी देता है। उनका जन्म एक दलित परिवार में हुआ था। इसी वजह से उन्होंने बचपन से ही सामाजिक भेदभाव का सामने करना पड़ा।

बाबासाहेब ने अपने साथ हुए भेदभाव का पूरा विवरण अपनी आत्मकथा “Waiting for a Visa” में बताया है। उन्होंने अपनी आत्मकथा में बताया कि कैसे उन्हें दलित होने की वजह से स्कूल में सबसे अलग बैठाया जाता था। इतना ही नहीं, उन्हें किताबें छूने तक की इजाजत नहीं थी। बाबासाहेब ने बचपन से ही भेदभाव और छुआछूत का सामना किया है।

बाबासाहेब का प्रारंभिक जीवन

बचपन से ही जाति भेदभाव का सामने करते हुए डॉ. अंबेडकर ने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। जिसके बाद वह स्कॉलरशिप की मदद से अमेरिका चले गए। जहां उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से एम.ए. और पीएच.डी. की डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड में बैरिस्टर की पढ़ाई की। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि पढ़ाई का अधिकार हर किसी को आसानी से नहीं मिलता। इसलिए उन्होंने दलितों को शिक्षा और सामाजिक अधिकार दिलाने के कई प्रयास किए।

किताबें छूने का अघिकार नहीं

लेकिन क्या आपको पता है डॉ. भीमराव अंबेडकर ने खुद की ही एक लाइब्रेरी बनाई थी। दरअसल, बाबासाहेब को किताबें छूने तक का अघिकार नहीं था। लेकिन पढ़ाई में उनकी इतनी रूचि थी कि उन्होंने अकेले ही अपनी एक निजी लाइब्रेरी बना डाली। उनकी उस लाइब्रेरी में 50000से ज्यादा किताबें थी। उन्होंने इतनी सारी किताबें दुनियाभर के अलग-अलग हिस्सों से मंगवाई थी। उनकी लाइब्रेरी में अर्थशास्त्र से लेकर कानून और साहित्य तक की किताबें शामिल थी।

ये लाइब्रेरी उनके शिक्षा के प्रति समर्पण, रूचि और जातिगत भेदभाव को जडे ले उखाड़ने की दिशा में उनके योगदान को दर्शाता है। उनके इसी योगदान ने उन्हें एक महान नेता बनाया।

भारतीय संविधान में बाबासाहेब की भूमिका

बाबासाहेब ने भारतीय संविधान के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाई है। भारत की आजादी के बाद बाबासाहेब को संविधान प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। संविधान निर्माण में उन्होंने सामाजिक न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों को अहम बताया। उनके इन सिद्धांतों की वजह से देश एक मजबूत धागे से बंधा हुआ है। इसके साथ डॉ. अंबेडकर भारत के पहले कानून मंत्री भी बने।

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