वक्फ कानून के खिलाफ मुस्लिम लॉ बोर्ड ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख, की ये मांग

Row on Waqf Law: वक्फ कानून के मुद्दे पर विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ ही कई मुस्लिम संगठन भी केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं। यूं तो ये मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है लेकिन अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने भी टॉप कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इसके साथ ही मुस्लिम लॉ बोर्ड ने केंद्र पर कई गंभीर आरोप भी लगा दिए हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने वक्फ कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अहम ये है कि वक्फ बिल को मिली राष्ट्रपति द्रौपदी मंजूरी की मंजूरी के बाद ये विरोध में दर्ज की गई ये सातवीं याचिका है।
लगाए ये आरोप
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने कहा, 'वक्फ कानून भेदभावपूर्ण और पूरी तरह से मनमाना है। ये भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन करने वाला भी है जिसके तहत धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन के अधिकारी सुनिश्चित होते हैं। ये कानून पूरी तरह से मुसलमानों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करने वाला है। केंद्र सरकार की कोशिश वक्फ प्रशासन पर पूरी तरह से नियंत्रण लेने की है।' ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मुताबिक, वक्फ बोर्ड के सदस्य गैर मुस्लिम होने को इस्लामी शरिया सिद्धांतों और भारतीय संविधान के खिलाफ बताया है।
एआईएमपीएलबी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वो तत्काल प्रभाव से सभी याचिकाओं पर सुनवाई करे और वक्फ कानून को रद्द करे। एआईएमपीएलबी ने कहा कि जैसे अधिकार हिंदू, सिख, ईसाई, जैन और बौद्धों को मिले हैं, वो मुस्लिम वक्फ को नहीं मिले हैं।
एआईएमपीएलबी ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट से हमारी अपील है कि इस विवादास्पद वक्फ कानून को हर हाल में रद्द करे और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। अहम ये है कि इससे पहले जमीयत उलमा-ए-हिंद, एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, आप विधायक अमानतुल्लाह खान और अन्य लोगों ने भी वक्फ कानून को कोर्ट में चुनौती दी और अब कोर्ट इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।
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