
Janmashtami Story Of Rajasthan: भारत में त्योहारों की शुरुवात हो गई है। अगले 2-3 महीनों में आने वाले कई पर्वों की तैयारी में लोग लगे हुए हैं। ऐसा ही एक त्योहार है, जन्माष्टमी। जिसकी तैयारी शुरु हो गई है। जन्माष्टमी को लोग उत्साह और उमंग के साथ मनाते हैं। दरअसल, इस दिन भागवान कृष्ण के जन्मोत्सव को लोग दुनियाभर में बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। देश और दुनिया के कोने-कोने में लोगों के द्वारा इस पर्व को मनाने की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। इस बात को हम जानते हैं कि जन्माष्टमी का पर्व सबसे अधिक धूमधाम से मथुरा और वृंदावन में मनाया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत के एक हिस्से में जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण को 21 तोपों की सलामी दी जाती है?ये शायद ही दुनिया के किसी हिस्से में देखने को मिलता हो। तो चलिए जानते हैं कि आखिर ऐसा किया क्यों जाता है?
इन मंदिर में दी जाती है 21 तोपों की सलामी
राजस्थान अपने शौर्य और संस्कृति के लिए जाना जाता है। राजस्थान की मिट्टी में शौर्य भी है तो वहां के लोगों में ईश्वर के प्रति आस्था भी खूब है। यही कारण है कि राजस्थान पर्यटन का केंद्र बना हुआ है। इसी राजस्थान की भूमि पर स्थित एक मंदिर में दशकों से अजीबोगरीब रिवाज चली आ रही है। दशकों से भक्त अपने भगवान को जन्मदिन के अवसर पर 21 बार तोप से सलामी देता है। राजस्थान के नाथद्वार में श्रीनाथ मंदिर में इस रिवाज को निभाया जाता है। श्रीनाथ मंदिर मे भगवान कृष्ण बाल रुप में विराजते हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर इस मंदिर के इर्दगिर्द मेले लगते हैं, दिनभर मंदिर में लोग पूजा पाठ करते हैं। यह सिलसिला रात 11:30 तक चलता रहता है। फिर 11:30 बजे मंदिर का कपाट आधे घंटे के लिए बंद कर दिया जाता है। जब रात 12 बजे मंदिर का कपाट खोला जाता है तो 21 बार तोप से सलामी दी जाती है। इसके साथ ही लोग भगवान कृष्ण के जन्म पर ढोल, नगाड़े बजाकर जश्न मनाते हैं।
मंदिर का इतिहास काफी पुराना है
श्रीनाथ मंदिर की खूबसूरती देखने लायक है। अरावली पर्वतमाला पर बसा श्री कृष्ण का ये मंदिर, पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। इस मंदिर के किनारे से बनास नदी बहती है। इसलिए इस जगह पर ना सिर्फ लोगों को अध्यात्मिक शांति मिलती है बल्कि प्रकृति के खूबसूरत नजारें मन मोह लेते हैं। इसके साथ ही मंदिर के पास ही कई घूमने लायक जगहे भी हैं। नाथद्वार से आप रणकपुर घूमने जा सकते हैं। यह एक ऐसी जगह है जो अरावली पहाड़ियों में स्थित है। जहां तक इस मंदिर के इतिहास के बारे में बात करें तो इसका इतिहास काफी पुराना है। कहा जाता है कि औरंगजेब ने इस मंदिर पर हमला कर दिया था, लेकिन यहां के पुजारियों ने श्रीनाथ जी की मुर्तियों को सुरक्षित निकाल कर ले गए।
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