
टीम इंडिया के अनुभवी कप्तान महेन्द्र सिंह धौनी और इस दौरे के लिए टीम में शामिल नए युवा चेहरों के लिये शनिवार से जिम्बाब्वे के खिलाफ शुरू हो रही सीमित ओवरों की क्रिकेट सीरीज अग्निपरीक्षा होगी जिसमें हर खिलाड़ी खुद को साबित करने का प्रयास करेगा और जीत के साथ सीरीज का आगाज करना चाहेगा। भारत और जिम्बाब्वे के बीच पहला अंतरराष्ट्रीय वनडे मैच शनिवार को हरारे क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जाना है जिसके लिए दोनों ही टीमें कमर कस चुकी हैं और पूरी तरह तैयार नजर आ रही हैं। इस दौरे के लिए टीम के सीनियर खिलाड़ियों विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन और रविचंद्रन अश्विन को आराम दिया गया है और उनकी जगह गैर अनुभवी खिलाड़ियों को शामिल किया गया है जिससे कप्तान धौनी पर कुछ दबाव जरूर होगा। जिम्बाब्वे के इस दौरे में शामिल केवल पांच खिलाड़ी ही साल 2015 में पिछले दौरे में टीम इंडिया का हिस्सा रहे थे। भारत ने तीन मैचों की उस वनडे सीरीज में 3-0 से जीत दर्ज की थी। दोनों टीमों के बीच दूसरा और तीसरा वनडे 13 और 15 जून को तथा तीन ट्वेंटी 20 मैच 18, 20 और 22 जून को हरारे क्रिकेट ग्राउंड पर ही खेले जाएंगे।
कप्तान धौनी पर इस लिहाज से भी खुद को साबित करने का मौका होगा कि हाल ही में आईपीएल-9 ट्वेंटी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट में उनकी टीम राइजिंग पुणे सुपरजाएंट्स कुछ कमाल नहीं कर सकी थी और प्लेऑफ तक पहुंचने में भी नाकाम रही थी। टूर्नामेंट के फाइनल तक अपनी टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर को पहुंचाने वाले विराट कोहली इस दौरे में टीम के साथ नहीं हैं। उनके अलावा सुपरस्टार ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को भी आराम दिया गया है। इस दौरे में सबसे अनुभवी खुद कप्तान महेन्द्र सिंह धौनी हैं जिन्होंने 275 वनडे और 68 ट्वेंटी-20 मुकाबले खेले हैं। इसके अलावा टीम के बाकी सदस्यों ने कुल 83 वनडे और 28 ट्वेंटी-20 मैच खेले हैं। टीम में युजवेन्द्र चहल, फैज फजल, मनदीप सिंह, करुण नायर और जयंत यादव ने एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। जिम्बाब्वे में हर खिलाड़ी खुद को साबित करने का भरसक प्रयास करेगा और शत प्रतिशत देने की कोशिश में लगेगा क्योंकि गैर अनुभवी खिलाड़ी इस दौरे से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करेंगे। यदि वह शानदार प्रदर्शन कर प्रभावित करने में सफल होते हैं तो उनके लिए आगे का रास्ता भी आसान हो जाएगा और इसलिए उन पर खुद को साबित करने का भी कुछ हद तक दबाव जरूर रहेगा। साल 2005 में अपने करियर के शुरुआती चरण में सौरभ गांगुली की कप्तानी में हरारे के इसी मैदान पर जिम्बाब्वे के खिलाफ धौनी ने 56 रन और नाबाद 67 रन की पारी खेली थी और साबित कर दिया था कि वह प्रतिभा के धनी हैं। धोनी ने 45 गेंदों में दो चौकों और ताबड़तोड़ चार छक्कों की मदद से 45 रन जबकि 63 गेंदों में एक चौके और तीन छक्कों के दम पर नाबाद 67 रन बनाए थे। धौनी इसके बाद हरारे में कभी नहीं खेले और इस बार उन्हें कप्तान के तौर पर जिम्मेदारी दी गयी है।
भारत के सबसे सफल कप्तान 34 वर्षीय धौनी इस दौरे पर एक कीर्तिमान और रच सकते हैं। धौनी को नौ हजार रन पूरे करने के लिए 82 रनों की जरूरत है। अगर वह इस दौरे में 82 रन बना लेते हैं तो वह ऐसा करने वाले पांचवें भारतीय बल्लेबाज बनेंगे। इसके बाद चैंपियंस ट्राफी करीब एक साल के बाद है और इस सीरीज का दोनों देशों के लिए अहम रोल है। दूसरी ओर जिम्बाब्वे के खिलाड़ियों पर भी खुद को साबित करने का काफी दबाव होगा। घरेलू टीम ने 18 खिलाड़ियों को इस दौरे के लिए टीम में जगह दी है और 12 खिलाड़ी ऐसे हैं जो दोनों फॉर्मेट में टीम का हिस्सा हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिहाज से टीम प्रबंधन ने अपने खिलाड़ियों को तैयार करने के उद्देश्य से भी ऐसा किया होगा। जिम्बाब्वे के अंतरिम कप्तान ग्रेम क्रीमर और कोच मखाया एंतिनी पर भी काफी दबाव होगा। हालांकि भारत के सामने उसे अपनी चुनौती पेश करने के लिए काफी दमखम लगाना होगा।
मेजबान जिम्बाब्वे ने हालांकि सबसे बेहतर खिलाड़ियों को मौका दिया है और इससे माना जा रहा है कि उसकी कोशिश किसी भी हाल में जीत दर्ज करने की होगी। हालांकि गैर अनुभवी भारतीय टीम के सामने उसकी मुश्किलें आसान नहीं होंगी। जिम्बाब्वे ऐसी पूर्ण सदस्यीय टीम है जो विश्व ट्वेंटी-20 के सुपर 10 के लिए भी क्वालिफाई करने में नाकाम रही थी। उसे वनडे में अफगानिस्तान से नीचे स्थान मिला जबकि दोनों देशों के बीच खेले गए पांच ट्वेंटी-20 मुकाबलों में जिम्बाब्वे को हार का सामना करना पड़ा था और इसी से समझा जा रहा है कि भारत का पलड़ा इस दौरे में भारी रहेगा।
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