अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को रूस का समर्थन, पहली बार मिली मान्यता

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को रूस का समर्थन, पहली बार मिली मान्यता

Afghanistan News: भारत के दोस्त रूस ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के लिए बड़ा कदम उठाते हुए आधिकारिक तौर पर मान्यता दे दी है। जिससे वह इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान को मान्यता देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। यह फैसला अगस्त 2021में तालिबान के सत्ता में लौटने के लगभग चार साल बाद आया है। जब अमेरिकी और नाटो सैनिकों की वापसी के बाद तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया था। रूस के इस कदम को तालिबान ने ऐतिहासिक करार दिया। जबकि यह वैश्विक समुदाय के लिए एक विवादास्पद मुद्दा बन गया है।

रूस का ऐतिहासिक कदम

रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उसने अफगानिस्तान के नए राजदूत गुल हसन हसन की मान्यता स्वीकार की है। मंत्रालय ने कहा 'इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान की सरकार को आधिकारिक मान्यता दे दी है। जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, परिवहन, कृषि और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।' साथ ही, आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ संयुक्त लड़ाई में मदद करेगी।

बता दें, रूस ने अप्रैल 2025में तालिबान को अपनी आतंकवादी संगठनों की सूची से हटा लिया था, जिसने इस मान्यता का रास्ता साफ किया। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले साल तालिबान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोगी करार दिया था।

रूस के ऐतिहासिक कदम के बाद तालिबान की प्रतिक्रिया

अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने रूस के इस कदम को 'ऐतिहासिक और साहसी' बताया। तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने कहा 'हम रूस के इस साहसी कदम की सराहना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि अन्य देश भी इसका अनुसरण करेंगे।' वहीं,  तालिबान के प्रवक्ता जिया अहमद तकाल ने इसे 'वैश्विक मान्यता की शुरुआत' करार दिया। मालूम हो कि तालिबान ने 2021 से लगातार अंतरराष्ट्रीय मान्यता की मांग की है। लेकिन उसकी महिलाओं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ कठोर नीतियों के कारण अधिकांश देशों ने इसे मान्यता देने से इनकार कर दिया था।

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