
Former CJI DY Chandrachud: बीते दिनों शिवसेना (यूबीटी) ने देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ पर कई आरोप लगाए थे। जिस पर अब डीवाई चंद्रचूड़ ने सफाई दी है। उन्होंने कहना है कि कोई एक पार्टी यह नहीं तय कर सकती कि सुप्रीम कोर्ट को किस मामले की सुनवाई करनी चाहिए।
दरअसल, शिवसेना नेता संजय राउत ने बीते दिनों चंद्रचूड़ की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था। शिवसेना नेता ने कहा कि उन्होंने महाराष्ट्र में दल-बदल करने वाले नेताओं के मन से कानून का डर खत्म कर दिया है। शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया कि अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय नहीं करके चंद्रचूड़ ने दलबदल के लिए सारे रास्ते खुले रखें।
शिवसेना के आरोपों पर क्या बोले CJI?
बता दें, इस मामले में पूर्व CJI ने एएनआई को एक इंटरव्यू दिया था। CJI ने शिवसेना के आरोपों पर कहा, 'मेरा जवाब बहुत सरल है। पूरे साल हमने कई मौलिक संवैधानिक मामलों पर सुनवाई की। हम 9 न्यायाधीशों की पीठ के निर्णयों, 7 न्यायाधीशों की पीठ के निर्णयों और 5 जजों की पीठ के फैसलों से निपटते रहे। ऐसे में क्या किसी एक पक्ष या व्यक्ति को यह तय करना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट को किस मामले की सुनवाई करनी चाहिए? माफ कीजिए, यह अधिकार मुख्य न्यायाधीश के पास होता है।'
शिवसेना के आरोपों पर CJI डीवाई चंद्रचूड़ कहते है '20 वर्षों से कई मामले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित पड़े हैं। अगर आप कहते हैं कि हमें जो समय दिया गया उसमें हमने एक मिनट भी काम नहीं किया तो ऐसी आलोचना जायज है। एससी इन 20 साल पुराने मामलों को क्यों नहीं ले रहा है और कुछ हालिया मुद्दों पर सुनवाई क्यों कर रहा है? इस बीच, अगर आप पुराने मामलों को लेते हैं तो आपको बताया जाएगा कि आपने इस विशेष केस को नहीं लिया। हमारे पास सीमित जनशक्ति है और न्यायाधीशों की निश्चित संख्या है। ऐसे में आपको संतुलन बनाना होता है।'
शिवसेना (यूबीटी) ने लगाए थे आरोप
बता दें, साल 2022 में शिवसेना का विभाजन हुआ था। जिसके बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले पार्टी के गुट ने एकनाथ शिंदे के साथ दलबदल करने वाले पार्टी विधायकों के खिलाफ एक्शन लिया था। इन विधायकों की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसके बाद शीर्ष अदालत ने इस याचिका पर फैसला करने का दायित्व विधानसभा अध्यक्ष पर छोड़ दिया था।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट को असली राजनीतिक दल घोषित किया था। जिस पर संजय राउत ने कहा कि अगर तत्कालीन पूर्व न्यायाधीश ने अयोग्यता याचिकाओं पर समय पर फैसला किया होता, तो नतीजे अलग होते।
Leave a comment