यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और राकेश टिकैत की हुई मुलाकात, सियासी अटकलें तेज!

यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और राकेश टिकैत की हुई मुलाकात, सियासी अटकलें तेज!

Brajesh Pathak Meet Rakesh Tikait: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के लखनऊ स्थित आवास पर 29 जुलाई को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भेंट की। मुलाकात के दौरान किसानों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।  यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले पंचायत चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं और किसान आंदोलन से जुड़े मुद्दे एक बार फिर सुलगता जा रहा है। वहीं, इस मुलाकात के सियासी और सामाजिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।

राकेश टिकैत ने इस मुलाकात को शिष्टाचार बताया और कहा कि उन्होंने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से किसानों के हितों और जनसामान्य से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की है। टिकैत ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा कि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जी से उनके लखनऊ स्थित आवास पर मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और किसानों व जनहित के विषयों पर बातचीत की है। वहीं, ब्रजेश पाठक ने भी इस मुलाकात को सौहार्दपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्होंने बीकेयू के वरिष्ठ नेता से हालाचाल जाना।

मुलाकात के निकाले जा रहे मायने

इसके इतर मुलाकात में न्यूनतम समर्थन मूल्य गन्ना किसानों के बकाया भुगतान, और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि राकेश टिकैत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय के कद्दावर नेता हैं और 2020-21 के किसान आंदोलन के उन्होंने अपना नाम बनाया। उनकी अगुवाई में भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लंबा आंदोलन चलाया था, जिसके बाद इन कानूनों को रद्द किया गया। ऐसे में, भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली राज्य सरकार के साथ टिकैत का यह संवाद सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।  

क्या कहना है कृषि विशेषज्ञों

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुलाकात पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए जाट समुदाय और किसानों के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक कदम हो सकती है। टिकैत ने 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी के खिलाफ किसानों से वोट न देने की बात कही थी। जिसका असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कुछ सीटों पर देखा गया था। ऐसे में यह मुलाकात दोनों पक्षों के बीच सुलह की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।  

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