
UP Cyber Crime News: भारत तकनीक अपनाने के दौर में सबसे आगे है। हर व्यक्ति के हाथ में आज मल्टीमीडिया मोबाइल है। इसका सबसे अधिक फायदा साइबर अपराधी उठा रहे हैं। सरकार साइबर अपराध के खिलाफ जरुर सख्ती करती है लेकिन अपराधी सरकार से दो कदम आगे निकल जाते हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। दरअसल, लखनऊ में पीजीआई की डॉक्टर रुचिका से करोड़ों रुपए की ठगी की गई है। ठगों ने पहले उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग और नेशनल सिक्योरिटी का डर दिखाकर नया फोन खरीदने को मजबूर किया और फिर उसके जरिए करोड़ों रुपए सरकारी खाता बताकर खुद के अकाउंट में ट्रांसफर कर लिया। डॉ रुचिका के अनुसार, ठगों ने आईपीएस और सीबीआई अधिकारी बनकर बात किया था। हालांकि, जब डॉ को मामले की सच्चाई पता चली तो उनका होश उड़ गया। जिसके बाद उन्होंने पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज करवाई है।
सात करोड़ रुपए मनी लॉन्ड्रिंग का लगाया था आरोप
पीजीआई की डॉक्टर रुचिका टंडन से ठगों ने 2 करोड़ 81 लाख रुपए की ठगी कर ली। डॉ को जब इसकी सच्चाई पता चली, तो उनका होश उड़ गया। इस मामले पर डॉक्टर रुचिका ने बताया कि मुझे एक सुबह कॉल आया। दूसरी ओर से बोल रहे व्यक्ति ने कहा कि वो ट्राइ से बोल रहा है। उसने मुझे कहा कि आपका फोन बंद कर दिया जाएगा क्योंकि आपके मोबइल नंबर के खिलाफ कई शिकायतें मुबंई क्राइम ब्रांच में दर्ज करवाई गई है। उधर से मुझे कहा गया कि आपके नंबर से बहुत से लोगों को परेशान किया जा रहा है। इस बात के जवाब में मैंने कहा कि ऐसा हो ही नहीं सकता। उल्टा मेरे नंबर पर ही पिछले कई दिनों से ऐसे कॉल आ रहे हैं। इसपर दूसरी तरफ से कहा गया कि हो सकता है आपको किसी मे भंसाया होगा। लेकिन आपके नंबर से कई लोगों को कॉल किए गए हैं। आप हमारे IPS अधिकारी से बात कर लो। इसके बाद उन्होंने कॉल किसी अन्य व्यक्ति के पास ट्रांसफर कर दिया।
नेशनल सिक्योरिटी का डर दिखाया
डॉक्टर रुचिका ने आगे बताया कि कॉल ट्रांसफर होने के बाद जिस सो कॉल्ड आईपीएस अधिकारी की आवाज आई। उसने कहा कि सिर्फ फोन कॉल की बात नहीं है। आपके बैंक अकाउंट से अवैध गतिविधियां हो रही हैं। उसने आगे कहा कि आपके खाते से सात करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की गई है। हमें आपको गिरफ्तार करने का निर्देश मिला है। फिर ठग जो IPS अफसर बन कर बात कर रहा था, उसने कहा कि अगर आप मुबंई नहीं आ सकती हैं तो आपको डिजिटल कस्टडी में लेना होगा। डॉक्टर रुचिका ने आगे कहा कि इसके बाद उस आदमी ने किसी और को फोन दे दिया जिसने अपना परिचय सीबीआई अधिकारी के रुप में दिया। उसने मुझसे कहा कि इस बात की जानकारी आप किसी को नहीं दे सकती हैं। क्योंकि ये मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अगर आप ये बात नहीं मानती हैं तो आपको 10 साल तक की सजा हो सकती है। फिर उस CBI अफसर ने मुझसे कहा कि इस मामले में आपके खिलाफ डिजिटली केस चलेगा। मेरे ऊपर अगले सात दिनों तक केस चलाया गया। इस दौरान इन लोगों ने मुझसे नया फॉन भी खरीदवाया।
स्काइप चला केस
डॉक्टर रुचिका के अनुसार, इन सात दिनों तक कथित कोर्ट की सुनवाई के दौरान मुझे स्काइप या व्हाट्सएप के जरिए जोड़ा जाता था। केस के दौरान एक जज, CBIअधिकारी और IPS अधिकारी भी मौजूद रहते थे। इस कथित सुनवाई के दौरान मुझसे कहा गया कि आपके पास जिसने भी अकाउंट में पैसे हैं, उसे सरकारी अकाउंट में ट्रांसफर करना होगा। फिर उन्होंने आगे कहा कि अगर वेरिफिकेशन में यह पता चल जाता है कि आपने मनी लॉन्ड्रिंग नहीं की है तो आपके पैसे वापस कर दिए जाएंगे। अगर कुछ गड़बड़ी सामने आई तो पैसा वापस नहीं किया जाएगा। डॉक्टर रुचिका ने कहा कि सुनवाई के दौरान जज और दोनों अफसरों ने अपनी आईडी कार्ड भी दिखाई थी। सभी आईडी कार्ड पर सीबीआई का लोगो लगा हुआ था।
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