क्या है सेब का इतिहास, हमें रोज कितने सेब का सेवन करना चाहिए

क्या है सेब का इतिहास, हमें रोज  कितने सेब का सेवन करना चाहिए

नई दिल्ली: ‘An Apple a Day, Keep the Doctor Away’ यह अंग्रेज़ी की कहावत सेब के लिए है। इसका मतलब होता है कि रोजाना एक सेब का सेवन करके बीमारियों से बचा जा सकता है। सेब में सभी पोषक तत्व मौजूद है, जो हमारे शरीर में पोषन की कमी को दूर करते हैं। सेब ऐसा फल है, जिसमें 25 प्रतिशत हवा मौजूद होती हैं। सेब हजारों वर्षों से एशिया और यूरोप में उगाया जाता हैं। शुगर, गठिया और मोतियाबिंद के जोखिम भी सेब कम करता हैं।

सेब खाने के फाइदे

सेब के अंदर सभी तरह के पोषक तत्व है, जो हमारे शरीर के र्कोलेस्ट्रोल को कम करता है। रक्तचाप को कम करने में सहायक होते है। सेब के अन्दर पेक्टिन नाम का तत्व होता है, जो शरीर के लिए लाभदायक बैक्टीरिया का संचालन करता है। इस प्रकार के बैक्टीरिया शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में सहायक होते हैं। इसके सेवन से हमारा लीवर मजबूत होता है। सेब के अन्दर पाए जाने वाले पौलिफिनोल जैसे एंटी-ओक्सिडेंट प्रभाव वाले तत्व शरीर में इन्सुलिन का उत्पादन करने वाली कोशिकाओं को मजबूत करने का काम करता है। इस कारण से सेब का सेवन हमारे अन्दर मधुमेह (Diabetes) की संभावना को कम कर देता है। रोजाना सेब खाने वाले लोगों में अस्थमा और Alergy जैसे रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है। सेब के अन्दर Vitamin-C, Potassium, Vitamin-K जैसे अत्यंत लाभकारी तत्व होते हैं। जो शरीर को बहुत सारी बीमारियों से बचाते हैं। हैरानी की बात ये है, की सेब का सेवन कैंसर के खतरे को भी कम करने में मददत करता है।

सेब का क्या है इतिहास

सेब के इतिहास को किसी समय में नहीं बांधा जा सकता। खोजबीन बताती है, कि यह फल मनुष्य के साथ ही पृथ्वी पर आया। पाषाण व लौह युग (करीब 10,000 से 8,500 ईसा पूर्व) में इसका वर्णन है, तब यह जंगली फल था। वनस्पति शास्त्री कहते हैं कि सेब सबसे पहले मध्य एशियाई देश कजाकिस्तान में पैदा हुआ। वहीं से यह बाकी दुनिया में पहुंचा। लेकिन इस बात में भी दम है कि यह फल हजारों वर्षों से एशिया और यूरोप में उगाया जा रहा है। भारत-अमेरिकी वनस्पति विज्ञानी सुषमा नैथानी ने सेब के चार उत्पत्ति स्थल मानती हैं।

इनमें फर्टाइल क्रिसेंट (इजराइल, जोर्डन, सीरिया, इराक आदि देश), मिडिल ईस्ट सेंटर (ईरान, तुर्कमेनिस्तान), सेंट्रल एशियाटिक सेंटर (कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान, भारत) व चीन व दक्षिण पूर्वी एशिया (चीन, थाइलेंड, विएतनाम, कोरिया) शामिल हैं।  एक थ्योरी यह भी कहती है कि जंगली सेब का मूल स्थान कैस्पियन सागर और काला सागर के बीच काकेशस नामक पहाड़ों की एक श्रृंखला में है। वैसे यह स्पष्ट है कि सेब का प्रसार सिल्क रूट से हुआ था, जो मध्य एशियाई देशों से निकलकर चीन, भारत भी आता था।

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