"देश पहले ही मुश्किल समय से गुजर रहा...", रोहिंग्या के मुद्दे पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को लगाई फटकार

Rohingyas Illegally in Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को देश से बाहर भेजने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि "देश पहले ही मुश्किल समय से गुजर रहा है" और ऐसी याचिकाएं बिना ठोस सबूतों  के दायर की जा रही हैं। 
 
जस्टीस बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका को "मनगढ़ंत" करार देते हुए याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए तथ्यों पर सवाल उठाए। कोर्ट ने साफ किया कि रोहिंग्या विदेशी नागरिक हैं और उनके खिलाफ विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, इसलिए रोहिंग्या को शरणार्थी मानने का कोई दायित्व नहीं है।
 
कोर्ट का फैसला और सरकार की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई 2025 को अपने एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में रोहिंग्या को डिपोर्ट करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था, "रोहिंग्या विदेशी हैं, उन्हें विदेश भेजा जाए।" इस आदेश के बाद सरकार ने जिलों में टास्क फोर्स और होल्डिंग सेंटर बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि अवैध घुसपैठियों की पहचान और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया तेज की जा रही है।
हालांकि, कुछ संगठन और याचिकाकर्ता रोहिंग्या को शरणार्थी का दर्जा देने और उन्हें भारत में रहने की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं। इन याचिकाओं को कोर्ट ने बार-बार खारिज किया है, यह कहते हुए कि बिना प्रमाण के दायर याचिकाएं स्वीकार्य नहीं हैं।
 
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
रोहिंग्या मुद्दा भारत के लिए लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। जानकारों का मानना है कि कोर्ट का यह फैसला अवैध घुसपैठ को रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार अब म्यांमार और बांग्लादेश के साथ समन्वय स्थापित कर डिपोर्टेशन प्रक्रिया को तेज करने की योजना बना रही है।
 

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